फर्जी बांग्लादेशी पासपोर्ट कांड: STF का बड़ा एक्शन, पुलिस सत्यापन की व्यवस्था सवालों के घेरे में; कई अधिकारियों पर गिर सकती है गाज
फर्जी बांग्लादेशी पासपोर्ट मामले में STF की बड़ी कार्रवाई, पुलिस सत्यापन की कड़ी खंगालने में जुटी
फर्जी बांग्लादेशी पासपोर्ट कांड: STF का बड़ा एक्शन, पुलिस सत्यापन की व्यवस्था सवालों के घेरे में; कई अधिकारियों पर गिर सकती है गाज
ग्वालियर (यश भारत डॉट कॉम नेटवर्क): फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय पासपोर्ट जारी किए जाने के गंभीर मामले में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। एसटीएफ अब पुलिस सत्यापन (Police Verification) की पूरी प्रक्रिया और इसमें शामिल कर्मियों की भूमिका को गहराई से खंगाल रही है।
बौद्ध भिक्षु बनकर रह रहे थे 22 बांग्लादेशी नागरिक
एसटीएफ की शुरुआती पड़ताल में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है:
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जिस समय 22 बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट डबरा (ग्वालियर) के पते पर बनाए जा रहे थे, उस दौरान ये सभी आरोपी डबरा क्षेत्र के सिमरिया ताल गांव स्थित बौद्ध विहार में फर्जी तरीके से बौद्ध भिक्षु बनकर रह रहे थे।
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इसी फर्जी पहचान और स्थानीय पते के सहारे पासपोर्ट आवेदन दाखिल किए गए थे।
थाने में बैठकर ही कर दिया भौतिक सत्यापन
जांच में पुलिस सत्यापन प्रक्रिया में हुई गंभीर लापरवाही और संदिग्ध भूमिका भी सामने आई है:
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ऑनलाइन प्रक्रिया: पासपोर्ट केंद्र में आवेदन जमा होने के बाद प्रक्रिया के तहत पुलिस वेरीफिकेशन के लिए फाइल एसपी कार्यालय की पासपोर्ट शाखा से ऑनलाइन डबरा थाने भेजी गई थी।
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लापरवाही/सांठगांठ: नियम अनुसार डबरा थाने के तत्कालीन एचसीएम (हेड कांस्टेबल मोहर्रिर) भूपेंद्र गुर्जर को संबंधित पते पर जाकर भौतिक सत्यापन करना था, आवेदकों की पुष्टि करनी थी और आसपास के लोगों से पूछताछ करनी थी।
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फर्जी ओके रिपोर्ट: आरोप है कि बिना मौके पर जाए, थाने में बैठकर ही सत्यापन की रिपोर्ट तैयार कर दी गई और ‘सब सही है’ (Ok) की टीप लगाकर फाइल आगे बढ़ा दी गई।
एसटीएफ अब इस मामले में शामिल पुलिसकर्मियों, बिचौलियों और फर्जी पासपोर्ट रैकेट से जुड़े अन्य संदिग्धों से पूछताछ कर रही है, जिससे जल्द ही कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
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