सिम बंद करना पड़ा महंगा, वोडाफोन आइडिया को उपभोक्ता आयोग से झटका,सेवा में कमी मानते हुए ₹5 हजार क्षतिपूर्ति और 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश

सिम बंद करना पड़ा महंगा, वोडाफोन आइडिया को उपभोक्ता आयोग से झटका,सेवा में कमी मानते हुए ₹5 हजार क्षतिपूर्ति और 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदे
कटनी। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, कटनी के अध्यक्ष सनत कुमार कश्यप एवं सदस्य रेखा पाण्डेय की पीठ ने मोबाइल सिम बंद किए जाने से जुड़े एक मामले में उपभोक्ता सतवीर सिंह भाटिया के पक्ष में फैसला सुनाते हुए वोडाफोन आइडिया की सेवा में कमी मानते हुए कंपनी को ₹5,000 क्षतिपूर्ति के साथ परिवाद प्रस्तुत किए जाने की तारीख 9 अक्टूबर 2018 से भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज अदा करने का आदेश दिया है।
मामले में सतवीर सिंह भाटिया की ओर से अधिवक्ता राहुल गुप्ता ने पैरवी की। परिवाद में कहा गया था कि भाटिया ने निर्धारित राशि का भुगतान कर कंपनी की सिम प्राप्त की थी और उसका उपयोग कर रहे थे, लेकिन बाद में कंपनी ने सिम बंद कर दी। इस संबंध में कंपनी को ई-मेल के माध्यम से शिकायत और नोटिस भेजकर सिम पुनः चालू करने की मांग भी की गई थी।
कंपनी की ओर से आयोग के समक्ष तर्क दिया गया कि सिम का 90 दिनों से अधिक समय तक उपयोग नहीं किए जाने के कारण उसे TRAI की गाइडलाइन के अनुसार डी-एक्टिवेट किया गया था। आयोग ने इस तर्क पर गौर करते हुए पाया कि कंपनी की ओर से ऐसा कोई दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो सके कि संबंधित सिम का निर्धारित 90 दिनों की अवधि में उपयोग नहीं किया गया था। आयोग ने इसी आधार पर कंपनी की सेवा में कमी पाई।
आयोग ने परिवाद को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए वोडाफोन आइडिया को ₹5,000 की राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित उपभोक्ता को अदा करने का आदेश दिया। साथ ही आदेश में कहा गया है कि 45 दिनों के भीतर आदेश का पालन नहीं होने पर, उपभोक्ता द्वारा निष्पादन प्रकरण प्रस्तुत किए जाने की स्थिति में कंपनी को ₹2,000 निष्पादन कार्यवाही व्यय भी वहन करना होगा।
करीब आठ साल चली कानूनी लड़ाई के बाद आए इस फैसले में उपभोक्ता की ओर से अधिवक्ता राहुल गुप्ता ने पक्ष रखा। आयोग ने कंपनी द्वारा केवल TRAI गाइडलाइन का हवाला दिए जाने को पर्याप्त न मानते हुए उसके समर्थन में दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत न किए जाने को महत्वपूर्ण माना।








