म्यूचुअल फंड निवेश: सिर्फ हरे नंबर देखकर न हों खुश, 3-5 साल का प्रदर्शन और रिस्क जरूर जांचें

नई दिल्ली:म्यूचुअल फंड निवेश: सिर्फ हरे नंबर देखकर न हों खुश, 3-5 साल का प्रदर्शन और रिस्क जरूर जांचें। म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में हरे रंग के बढ़ते नंबर देखकर हर निवेशक को सुकून मिलता है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या आपका निवेश वाकई बाजार की रफ्तार से सही तरीके से बढ़ रहा है? कई बार निवेशक सिर्फ रिटर्न देखकर संतुष्ट हो जाते हैं, जबकि फंड का प्रदर्शन उसके मुकाबले कमजोर हो सकता है।

म्यूचुअल फंड निवेश: सिर्फ हरे नंबर देखकर न हों खुश, 3-5 साल का प्रदर्शन और रिस्क जरूर जांचें

विशेषज्ञों के अनुसार, निवेश का असली लक्ष्य महंगाई को मात देना होता है। अगर महंगाई दर 6% के आसपास है और आपका रिटर्न भी उतना ही है, तो वास्तविक लाभ नहीं हो रहा है। इसी वजह से लंबी अवधि के इक्विटी म्यूचुअल फंड में 10-12% या उससे अधिक रिटर्न की उम्मीद की जाती है।

बेंचमार्क से तुलना जरूरी

हर म्यूचुअल फंड का एक बेंचमार्क इंडेक्स होता है जैसे निफ्टी 50 या सेंसेक्स। अगर आपका फंड लगातार 2-3 साल तक अपने बेंचमार्क से पीछे रह रहा है, तो यह कमजोर प्रदर्शन का संकेत है। साथ ही, उसी कैटेगरी के दूसरे फंड अगर बेहतर रिटर्न दे रहे हैं, तो निवेश की समीक्षा जरूरी हो जाती है।

रिस्क का सही आकलन भी जरूरी

सिर्फ ज्यादा रिटर्न देखकर निवेश करना सही रणनीति नहीं है। इसके लिए कुछ तकनीकी संकेतकों को समझना जरूरी है:

Standard Deviation: रिटर्न में उतार-चढ़ाव कितना है
Beta: बाजार के मुकाबले फंड कितना रिस्क ले रहा है
SIP निवेशकों के लिए XIRR अहम

जो निवेशक SIP के जरिए निवेश करते हैं, उनके लिए सिर्फ NAV देखकर रिटर्न समझना सही नहीं है। ऐसे निवेशकों के लिए XIRR (Extended Internal Rate of Return) असली रिटर्न को सही तरीके से दर्शाता है, क्योंकि इसमें अलग-अलग समय पर किए गए निवेश का पूरा हिसाब शामिल होता है।

लंबी अवधि की सोच जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी फंड का असली प्रदर्शन 3 से 5 साल की अवधि में देखा जाना चाहिए। साथ ही फंड मैनेजर की स्थिरता और पोर्टफोलियो की संरचना पर भी नजर रखना जरूरी है।

अगर कोई फंड लगातार बेंचमार्क और प्रतिस्पर्धी फंड्स से पीछे है या जरूरत से ज्यादा जोखिम ले रहा है, तो निवेशक को समय रहते अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करनी चाहिए।

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