
दिल्ली दंगा: शरजील इमाम और उमर खालिद की नई जमानत याचिकाओं पर कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित, बिना ट्रायल 6 साल जेल में रहने की दी दलील
नई दिल्ली: उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के पीछे बड़ी साजिश (Larger Conspiracy Case) रचने के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की नई जमानत याचिकाओं पर दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने शनिवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। दोनों पक्षों के वकीलों की लंबी और तीखी दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने फैसला अपने पास सुरक्षित रखा, जो जल्द ही सुनाया जा सकता है।
कोर्ट में क्या हुई बहस?
सुनवाई के दौरान आरोपियों और दिल्ली पुलिस के वकीलों के बीच सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों और व्याख्याओं को लेकर कानूनी बहस छिड़ गई:
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बचाव पक्ष की दलील: शरजील इमाम की ओर से पेश वकील तालिब मुस्तफा ने तर्क दिया कि क्या जमानत की अर्जी पर 1 साल तक रोक लगाने जैसे कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं? इस कानूनी बिंदु पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच को विचार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में कुछ अन्य सह-आरोपियों को मामले को बड़ी बेंच के पास भेजने का फायदा मिला है।
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दिल्ली पुलिस का रुख: दिल्ली पुलिस के विशेष वकील ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि जब तक बड़ी बेंच से कोई नया स्पष्टीकरण नहीं मिल जाता, तब तक सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले दिए गए निर्देश और रोक पूरी तरह लागू रहेंगे। पुलिस ने कहा कि अगर आरोपियों को कोई शिकायत थी, तो उन्हें कड़कड़डूमा कोर्ट के बजाय स्पष्टीकरण के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए था। दिल्ली दंगा: शरजील इमाम और उमर खालिद की नई जमानत याचिकाओं पर कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित, बिना ट्रायल 6 साल जेल में रहने की दी दलील
‘बिना आरोप तय हुए जेल में बीते 6 साल’ – उमर और शरजील
उमर खालिद और शरजील इमाम ने कोर्ट के सामने जेल में बिताए लंबे वक्त को आधार बनाकर राहत की मांग की है:
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उमर खालिद का तर्क: खालिद ने कोर्ट को बताया कि मामले में अभी तक आरोप भी तय (Charges Frame) नहीं हुए हैं और वे लगभग 6 साल से हिरासत में हैं। उन्होंने दलील दी कि मामले में आरोपियों, गवाहों और दस्तावेजों की भारी संख्या को देखते हुए जल्द ट्रायल (मुकदमा) शुरू होने की कोई संभावना नहीं दिख रही है।
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शरजील इमाम का पक्ष: शरजील ने अपनी अर्जी में कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 6 महीने पहले जमानत खारिज किए जाने के बाद भी निचली अदालत की कार्यवाही में कोई “खास प्रगति” नहीं हुई है। बिना ट्रायल के उन्हें भी करीब 6 साल जेल में बीत चुके हैं।
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क्यों दाखिल करनी पड़ी नई जमानत याचिकाएं?
दरअसल, इसी साल 5 जनवरी (2026) को सुप्रीम कोर्ट ने UAPA के इस मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम दोनों को जमानत देने से साफ इनकार कर दिया था। हालांकि, शीर्ष अदालत ने इसी मामले के अन्य सह-आरोपियों—गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को राहत दे दी थी। इसी के बाद दोनों आरोपियों ने जमानत देने से इनकार करने वाली कानूनी व्याख्या पर सवाल उठाते हुए कड़कड़डूमा कोर्ट में यह नई अर्जियां दाखिल की थीं, जिस पर अब कोर्ट जल्द ही अपना फैसला सुनाएगा।








