ई-गिफ्ट कार्ड रिडीम कराने में टालमटोल पड़ी भारी, लैक्मे सैलून पर उपभोक्ता आयोग ने लगाया ₹10 हजार का हर्जाना,₹2 हजार का ई-गिफ्ट कार्ड और ₹2 हजार वाद व्यय भी लौटाने के आदेश

ई-गिफ्ट कार्ड रिडीम कराने में टालमटोल पड़ी भारी, लैक्मे सैलून पर उपभोक्ता आयोग ने लगाया ₹10 हजार का हर्जाना,₹2 हजार का ई-गिफ्ट कार्ड और ₹2 हजार वाद व्यय भी लौटाने के आदे
कटनी। लैक्मे सैलून में सेवा लेने के बाद मिले ₹2 हजार के ई-गिफ्ट कार्ड को रिडीम कराने में कथित टालमटोल करना लैक्मे इंडिया/हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड और लैक्मे सैलून को महंगा पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, कटनी ने मामले में सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार मानते हुए परिवादी सतवीर सिंह भाटिया के पक्ष में आदेश पारित किया है। आयोग ने लैक्मे इंडिया/हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड एवं लैक्मे सैलून को संयुक्त एवं पृथक रूप से ₹10 हजार क्षतिपूर्ति देने के साथ ₹2 हजार के ई-गिफ्ट कार्ड की राशि तथा ₹2 हजार वाद व्यय अदा करने के निर्देश दिए हैं।
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष सनत कुमार कश्यप एवं सदस्य श्रीमती रेखा पाण्डेय ने 23 सितंबर 2026 को मामले में आदेश पारित किया। परिवादी की ओर से अधिवक्ता राहुल गुप्ता ने पैरवी की।
तकनीकी समस्या का दिया था हवाला
मामले में सतवीर सिंह भाटिया ने लैक्मे इंडिया/हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड, लैक्मे सैलून कटनी तथा एरिया सेल्स मैनेजर जॉय अर्पित पीटर को पक्षकार बनाया था। परिवादी ने लैक्मे सैलून में सेवा ली थी, जिसके लिए ₹9,100 का भुगतान किया जाना था। इस दौरान ₹2 हजार के ई-गिफ्ट कार्ड के माध्यम से भुगतान कराने का प्रयास किया गया, लेकिन सैलून की ओर से इसका लाभ तत्काल उपलब्ध नहीं कराया गया।
सैलून की ओर से वेबसाइट में तकनीकी समस्या होने का हवाला दिया गया। बाद में ई-गिफ्ट कार्ड के उपयोग के लिए दो दिन पहले सूचना देना आवश्यक होने की बात भी कही गई। परिवादी ने आपत्ति दर्ज कर समस्या के समाधान का प्रयास किया, लेकिन तत्काल निराकरण नहीं होने पर मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा।
दावों के समर्थन में दस्तावेज नहीं मिले
सुनवाई के दौरान आयोग ने प्रस्तुत तथ्यों और दस्तावेजों का परीक्षण किया। आयोग के समक्ष वेबसाइट में तकनीकी समस्या अथवा ई-गिफ्ट कार्ड रिडीम कराने के लिए दो दिन पूर्व सूचना अनिवार्य होने के दावे के समर्थन में कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। आयोग ने यह भी पाया कि नोटिस मिलने के बाद भी उपभोक्ता की समस्या का तत्काल समाधान नहीं किया गया।
आयोग के नोटिस के बाद लैक्मे के मुख्य कार्यालय की ओर से परिवादी से संपर्क कर ई-गिफ्ट कार्ड का भुगतान कराने का प्रस्ताव दिया गया। घटनाक्रम को देखते हुए आयोग ने माना कि उपभोक्ता को उपलब्ध ई-गिफ्ट कार्ड का लाभ देने में अनावश्यक रोक और विलंब किया गया, जो सेवा में कमी की श्रेणी में आता है। साथ ही इसे अनुचित व्यापारिक व्यवहार भी माना गया।
आदेश में क्या कहा गया
आयोग ने लैक्मे इंडिया/हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड एवं लैक्मे सैलून को संयुक्त एवं पृथक रूप से ₹10 हजार क्षतिपूर्ति, ₹2 हजार ई-गिफ्ट कार्ड राशि तथा ₹2 हजार वाद व्यय परिवादी को अदा करने के निर्देश दिए हैं। इस तरह आदेश के तहत परिवादी को कुल ₹14 हजार का भुगतान और ई-गिफ्ट कार्ड राशि का लाभ दिए जाने का निर्देश हुआ है।








