विदेशी शेयरों से कमाई पर ITR में सतर्कता जरूरी, जानकारी छिपाने पर लग सकता है 200% तक जुर्माना

विदेशी शेयरों से कमाई पर ITR में सतर्कता जरूरी, जानकारी छिपाने पर लग सकता है 200% तक जुर्माना

नई दिल्ली। विदेशी शेयरों से कमाई पर ITR में सतर्कता जरूरी, जानकारी छिपाने पर लग सकता है 200% तक जुर्माना अगर आपने एप्पल (Apple) या टेस्ला (Tesla) जैसी विदेशी कंपनियों के शेयरों में निवेश कर कमाई की है, तो आयकर रिटर्न (ITR) भरते समय इसकी सही जानकारी देना अनिवार्य है। विशेषज्ञों के अनुसार विदेशी आय का खुलासा न करने पर आयकर विभाग सख्त कार्रवाई कर सकता है और कर राशि पर 200 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

वायरल होने के चक्कर में खतरनाक स्टंट: पिता को पैक कर कूरियर करने पहुंचा परिवार, पकड़े गए तो दिया अजीब तर्क

विदेशी शेयरों से कमाई पर ITR में सतर्कता जरूरी, जानकारी छिपाने पर लग सकता है 200% तक जुर्माना

भारतीय आयकर नियमों के तहत, यदि कोई व्यक्ति भारत का निवासी (Resident Indian) है, तो उसकी पूरी वैश्विक आय (Global Income) कर के दायरे में आती है। इसका अर्थ है कि दुनिया के किसी भी देश से हुई आय को ITR में घोषित करना आवश्यक है।

अमेरिकी बाजार में निवेश के दौरान कंपनियां विदेशी निवेशकों को डिविडेंड देने से पहले लगभग 25 प्रतिशत टैक्स काट लेती हैं। कई निवेशकों को लगता है कि टैक्स कट जाने के बाद उसे ITR में दिखाने की जरूरत नहीं है, लेकिन यह धारणा गलत है। लाभांश की पूरी राशि ITR में दिखानी होती है। हालांकि, निवेशक फॉरेन टैक्स क्रेडिट (FTC) का दावा कर एक ही आय पर दो बार टैक्स से बच सकते हैं।

शेड्यूल FA और आय की घोषणा में अंतर

ITR के शेड्यूल FA (Foreign Assets)में विदेशी संपत्तियों का विवरण दिया जाता है, लेकिन इससे प्राप्त आय को अलग से घोषित करना होता है। विदेशी शेयरों से मिलने वाले डिविडेंड को अन्य स्रोतों से आय’ (Income from Other Sources) में दर्ज करना अनिवार्य है। ऐसा न करने पर रिटर्न गलत माना जा सकता है।

जानकारी साझा करने की व्यवस्था मजबूत

भारत सरकार ने कई देशों के साथ वित्तीय सूचना आदान-प्रदान समझौते किए हैं। इसके तहत विदेशी बैंक खातों और निवेश से जुड़ी जानकारी टैक्स विभाग तक पहुंचती है। विभाग द्वारा डेटा मिलान के दौरान विसंगति मिलने पर जांच शुरू की जा सकती है।

विदेशी आय को छिपाना अंडर-रिपोर्टिंग की श्रेणी में आता है, जिसके तहत कर देयता पर 50 प्रतिशत से 200 प्रतिशत तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

गलती सुधारने का विकल्प उपलब्ध

यदि पिछले रिटर्न में यह जानकारी नहीं दी गई है, तो करदाता अपडेटेड ITR (Updated ITR) दाखिल कर सकते हैं। इसे मूल रिटर्न की तारीख से 24 महीनों के भीतर जमा किया जा सकता है।

1 वर्ष के भीतर सुधार पर अतिरिक्त 25% कर
1 से 2 वर्ष के बीच सुधार पर 50% अतिरिक्त कर

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेशक अपने ब्रोकरेज स्टेटमेंट, डिविडेंड रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखें और टैक्स फाइलिंग के समय सही जानकारी दर्ज करें, ताकि भविष्य में कानूनी और वित्तीय परेशानी से बचा जा सके। विदेशी शेयरों से कमाई पर ITR में सतर्कता जरूरी, जानकारी छिपाने पर लग सकता है 200% तक जुर्माना

 

Exit mobile version