ब्रेकिंग: होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी फायरिंग से हड़कंप: तीन जहाजों पर हमला, भारत जा रहे जहाज को भी रोका
अंतरराष्ट्रीय जलसीमा में ताबड़तोड़ फायरिंग
जानकारी के अनुसार, ईरानी सेना ने सबसे पहले एक कंटेनर जहाज को निशाना बनाया, इसके बाद दूसरे जहाज पर भी गोलियां चलाई गईं। ईरानी मीडिया का दावा है कि इन जहाजों ने चेतावनियों को नजरअंदाज किया था, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई। पकड़े गए जहाजों की पहचान एमएससी फ्रांसिस्का और एपामिनोड्स के रूप में हुई है, जिन्हें ईरानी बल अपने साथ ले गए हैं। वहीं तीसरे जहाज यूफोरिया पर भी हमला हुआ, जो ईरानी तट के पास फंसा हुआ बताया जा रहा है।
संघर्षविराम के बीच बढ़ा तनाव
यह हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और इस्राइल के साथ ईरान के बीच शांति वार्ता और संघर्षविराम को आगे बढ़ाने की कोशिशें चल रही थीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में संघर्षविराम को अनिश्चितकाल तक बढ़ाने की बात कही थी, लेकिन ईरान इससे नाराज है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसकी समुद्री घेराबंदी और प्रतिबंधों को नहीं हटाता, तब तक किसी भी शांति वार्ता की संभावना नहीं है। इसी कारण समुद्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
तेल बाजार में उथल-पुथल
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव का सीधा असर वैश्विक बाजार पर पड़ा है। कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमत 98 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जो युद्ध शुरू होने के बाद से लगभग 35% की वृद्धि है।
तेल की कीमतों में इस उछाल से पेट्रोल-डीजल महंगा होने की आशंका बढ़ गई है। साथ ही माल ढुलाई लागत बढ़ने से खाने-पीने की चीजों और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
कूटनीतिक प्रयास ठप
पाकिस्तान और अन्य देशों की मध्यस्थता की कोशिशें भी फिलहाल रुकती नजर आ रही हैं। ईरान ने अभी तक किसी नए वार्ता प्रतिनिधिमंडल को भेजने की पुष्टि नहीं की है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि जब तक अमेरिका प्रतिबंधों में राहत नहीं देता, बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी।
युद्ध में भारी नुकसान का दावा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस पूरे संघर्ष में अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है। ईरान, लेबनान, इस्राइल और अन्य खाड़ी देशों में भारी जनहानि और आर्थिक नुकसान हुआ है। अमेरिका के कुछ सैनिकों के मारे जाने की भी जानकारी सामने आई है।
बढ़ता खतरा, बिगड़ती स्थिति
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी है कि अगर दबाव जारी रहा तो और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, इस्राइल और हिजबुल्लाह के बीच भी तनाव बना हुआ है। फिलहाल स्थिति यह है कि कूटनीति कमजोर पड़ चुकी है और समुद्र से लेकर जमीन तक टकराव बढ़ता जा रहा है। अगर जल्द कोई ठोस समझौता नहीं हुआ तो यह संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा संकट खड़ा कर सकता है।

