RBI का बड़ा फैसला: क्रेडिट कार्ड फ्रॉड होने पर 5 दिन में वापस मिलेगा पैसा, एक्स्ट्रा ब्याज से मिलेगी मुक्ति; जानें नया ‘शैडो रिवर्सल’ नियम
RBI का बड़ा फैसला: क्रेडिट कार्ड फ्रॉड होने पर 5 दिन में वापस मिलेगा पैसा, एक्स्ट्रा ब्याज से मिलेगी मुक्ति; जानें नया 'शैडो रिवर्सल' नियम
RBI का बड़ा फैसला: क्रेडिट कार्ड फ्रॉड होने पर 5 दिन में वापस मिलेगा पैसा, एक्स्ट्रा ब्याज से मिलेगी मुक्ति; जानें नया ‘शैडो रिवर्सल’ नियम
नई दिल्ली। देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल पेमेंट्स और ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश के करोड़ों बैंक ग्राहकों और क्रेडिट कार्ड यूजर्स को बहुत बड़ी राहत दी है। केंद्रीय बैंक ने एक नया और ऐतिहासिक सर्कुलर जारी किया है, जिसके तहत यदि किसी ग्राहक के क्रेडिट कार्ड से कोई धोखाधड़ी (Fraud) होती है, तो बैंक को शिकायत मिलने के 5 कार्यदिवसों के भीतर विवादित राशि का अस्थायी क्रेडिट ग्राहक के खाते में डालना होगा।
रिजर्व बैंक के ये नए और कड़े नियम 1 जनवरी 2027 से देश के सभी बैंकों और वित्तीय संस्थाओं पर लागू हो जाएंगे।
क्या है नया ‘शैडो रिवर्सल’ नियम?
अक्सर देखा जाता है कि क्रेडिट कार्ड से फ्रॉड होने के बाद भी बैंक जांच का हवाला देकर महीनों तक पैसे होल्ड रखते हैं और इस दौरान ग्राहक को उस धोखाधड़ी वाली राशि पर भी भारी ब्याज (Interest) या लेट फीस चुकानी पड़ती है।
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5 दिन में अस्थायी क्रेडिट: नए नियम के मुताबिक, फ्रॉड की शिकायत मिलते ही बैंक को 5 दिनों के भीतर ‘शैडो रिवर्सल’ (Shadow Reversal) यानी विवादित राशि के बराबर का अस्थायी फंड ग्राहक के क्रेडिट कार्ड अकाउंट में क्रेडिट करना होगा।
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ब्याज से मिलेगी राहत: जब तक बैंक इस फ्रॉड की पूरी जांच पूरी नहीं कर लेता, तब तक ग्राहक को उस विवादित राशि का बोझ नहीं उठाना पड़ेगा और न ही उस राशि पर कोई एक्स्ट्रा ब्याज या पेनाल्टी जोड़ी जा सकेगी।
कब मिलेगी ‘जीरो लायबिलिटी’ (Zero Liability)?
आरबीआई ने ग्राहकों की जिम्मेदारी (Liability) को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है:
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बैंक की गलती पर 100% सुरक्षा: यदि धोखाधड़ी बैंक की किसी तकनीकी लापरवाही, सिस्टम की कमी या सुरक्षा में चूक के कारण हुई है, तो ग्राहक की देनदारी शून्य (Zero) होगी। ऐसे मामलों में ग्राहक को पूरी राशि वापस मिलेगी, भले ही उसने शिकायत दर्ज कराई हो या नहीं।
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थर्ड पार्टी फ्रॉड पर नियम: यदि फ्रॉड किसी तीसरी पार्टी (हैकर्स या ऑनलाइन स्कैम) की वजह से हुआ है और ग्राहक घटना के 5 दिनों के भीतर बैंक को इसकी सूचना दे देता है, तब भी ग्राहक को ‘जीरो लायबिलिटी’ का लाभ मिलेगा और पूरा पैसा रिफंड होगा।
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देरी से शिकायत पर क्या होगा? यदि ग्राहक फ्रॉड होने के 5 दिनों के बाद बैंक को सूचित करता है, तो उसकी वित्तीय जिम्मेदारी बैंक की आंतरिक पॉलिसी और शर्तों के अनुसार तय होगी।
₹500 से ऊपर के हर ट्रांजैक्शन पर SMS अलर्ट जरूरी
डिजिटल सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए आरबीआई ने बैंकों को अलर्ट सिस्टम सुधारने के निर्देश दिए हैं:
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बैंकों के लिए 500 रुपये से अधिक के हर इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजैक्शन पर ग्राहकों को तुरंत SMS और ईमेल अलर्ट भेजना अनिवार्य होगा।
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500 रुपये से कम के ट्रांजैक्शन के लिए बैंक अपनी पॉलिसी तय कर सकते हैं, लेकिन इस अलर्ट सर्विस के लिए ग्राहकों से कोई भी अतिरिक्त शुल्क (Charges) नहीं वसूला जाएगा।
छोटे फ्रॉड के पीड़ितों को भी मिलेगा मुआवजा
आरबीआई ने पहली बार छोटे मूल्य के डिजिटल फ्रॉड के पीड़ितों के लिए मुआवजे का एक विशेष प्रावधान किया है:
यदि किसी ग्राहक के साथ डिजिटल फ्रॉड होता है और नुकसान की राशि 50,000 रुपये तक है, तो वास्तविक पीड़ित पाए जाने पर उसे नुकसान का 85 प्रतिशत या अधिकतम 25,000 रुपये तक का मुआवजा बैंक द्वारा दिया जाएगा। ध्यान रहे, यह विशेष वित्तीय राहत ग्राहक को अपने पूरे जीवनकाल में केवल एक बार ही मिल सकेगी।
आरबीआई के इस कदम से न सिर्फ डिजिटल बैंकिंग प्रणाली में आम जनता का भरोसा मजबूत होगा, बल्कि साइबर ठगी का शिकार होने वाले लोगों को मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना से भी मुक्ति मिलेगी।








