एमपी हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: B.Ed डिग्री से नहीं बन सकेंगे प्राथमिक शिक्षक, जानें मध्य प्रदेश की 3 बड़ी खबरें
जबलपुर / भोपाल: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने प्राथमिक शिक्षक भर्ती-2025 को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्त शिक्षकों के समयमान वेतनमान और कटनी की निलंबित CSP नेहा पच्चीसिया मामले में भी अहम निर्देश दिए हैं। पढ़ें आज की तीन मुख्य खबरें:
1. प्राथमिक शिक्षक भर्ती-2025: B.Ed धारकों को बड़ा झटका
हाई कोर्ट की एकलपीठ (न्यायमूर्ति पवन कुमार द्विवेदी) ने जबलपुर निवासी अपूर्वा शर्मा की याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि प्राथमिक शिक्षक पद के लिए केवल B.Ed डिग्री मान्य नहीं होगी। एमपी हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: B.Ed डिग्री से नहीं बन सकेंगे प्राथमिक शिक्षक, जानें मध्य प्रदेश की 3 बड़ी खबरें
हाई कोर्ट का स्पष्ट रुख: कोर्ट ने कहा कि प्राथमिक शिक्षक पद के लिए D.El.Ed (D.Ed) या इसके समकक्ष डिप्लोमा होना अनिवार्य है।
क्या था मामला: याचिकाकर्ता ने 2018 में B.Ed किया था और 2020 में पात्रता परीक्षा पास की थी। 2025 की चयन परीक्षा में सफल होने के बावजूद दस्तावेज़ सत्यापन (Document Verification) में आवश्यक योग्यता न होने के कारण उसे अपात्र घोषित कर दिया गया था।
दलील खारिज: जनजातीय कार्य विभाग के नियमों में B.Ed का उल्लेख होने का हवाला देकर पात्रता का दावा करने वाली याचिका को कोर्ट ने सिरे से निरस्त कर दिया।
2. सेवानिवृत्त शिक्षक के चतुर्थ समयमान वेतनमान पर 3 माह में निर्णय का आदेश
कटनी के सेवानिवृत्त सहायक शिक्षक मिठाईलाल अहिरवार की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट (न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह) ने राहत दी है।
निर्देश: कोर्ट ने सक्षम अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता के चतुर्थ समयमान वेतनमान से जुड़े लंबित अभ्यावेदन (Representation) पर 3 महीने के भीतर नियमानुसार कारणयुक्त आदेश जारी किया जाए।
बता दें कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति वर्ष 1987 में हुई थी और वे मार्च 2026 में सेवानिवृत्त हुए हैं।
3. कटनी की निलंबित CSP नेहा पच्चीसिया मामले में सुनवाई टली
कटनी की निलंबित पुलिस अधिकारी (CSP) नेहा पच्चीसिया से जुड़े मामले में हाई कोर्ट में प्रस्तावित सुनवाई समय की कमी के कारण टल गई है।
अब 15 अक्टूबर को सुनवाई: न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति रामकुमार चौबे की युगलपीठ अब इस मामले पर 15 अक्टूबर को सुनवाई करेगी।
मुख्य बिंदु: इस मामले में नेहा पच्चीसिया की ओर से एफआईआर रद्द करने व अग्रिम जमानत की मांग की गई है, जबकि शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से पूरे मामले की जांच सीबीआई (CBI) से कराने की याचिका दाखिल की गई है।











