सुप्रीम कोर्ट के AT-1 बॉन्ड फैसले के बाद यस बैंक के शेयर धड़ाम, दो दिनों में 17% से ज्यादा टूटे

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सुप्रीम कोर्ट के AT-1 बॉन्ड फैसले के बाद यस बैंक के शेयर धड़ाम, दो दिनों में 17% से ज्यादा टूटे

मुंबई: सुप्रीम कोर्ट द्वारा यस बैंक (Yes Bank) के ₹8,415 करोड़ के AT-1 बॉन्ड को राइट-ऑफ (रद्द) करने के फैसले को निरस्त किए जाने के बाद बैंक के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली है। 16 अक्टूबर 2026 को यस बैंक का शेयर 3.42% गिरकर ₹17.50 पर बंद हुआ। इसके साथ ही बीते दो कारोबारी दिनों में शेयर में कुल 17% से अधिक की गिरावट दर्ज की जा चुकी है।

कैपिटल रेशियो पर पड़ेगा असर, फिर भी टियर-1 स्थिर

यस बैंक ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार AT-1 बॉन्ड्स को दोबारा बहाल (reinstate) करने से बैंक के कोर कैपिटल रेशियो में करीब 250 बेसिस पॉइंट्स (2.5%) की कमी आ सकती है।

हालांकि, बैंक ने निवेशकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि इस बदलाव के बावजूद उसका प्रो-फॉर्मा टियर-1 कैपिटल रेशियो 14% के सुरक्षित स्तर पर बना रहेगा।

S&P ग्लोबल रेटिंग्स: ‘बैंक की क्रेडिट रेटिंग पर असर नहीं’

वैश्विक रेटिंग एजेंसी S&P Global Ratings का मानना है कि इस अदालती फैसले से यस बैंक की क्रेडिट रेटिंग पर तत्काल कोई विपरीत असर नहीं पड़ेगा।

  • मजबूत स्थिति: मार्च 2026 के अंत तक बैंक का कॉमन इक्विटी टियर-1 (CET1) अनुपात 13.87% था। 250 बेसिस पॉइंट घटने के बाद भी यह नियामक (Regulatory) सीमा 5.5% से काफी ऊपर रहेगा।

  • कमाई पर दबाव: हालांकि, इस फैसले से बैंक की भविष्य की लाभप्रदता (profitability) और कमाई पर दबाव बन सकता है।

  • रिस्क-एडजस्टेड कैपिटल: S&P का अनुमान है कि मार्च 2028 तक बैंक का रिस्क-एडजस्टेड कैपिटल (RAC) रेशियो घटकर 8% से 8.5% के बीच रह सकता है, जो मार्च 2026 में 9% दर्ज किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों रद्द किया था बॉन्ड राइट-ऑफ?

साल 2020 में जब यस बैंक गंभीर वित्तीय संकट में फंसा था, तब बैंक के प्रशासक (Administrator) ने पुनर्गठन योजना (Restructuring Scheme) के तहत निवेशकों के ₹8,415 करोड़ के AT-1 बॉन्ड पूरी तरह से राइट-ऑफ (शून्य) कर दिए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपने फैसले में कहा कि तत्कालीन पुनर्गठन योजना में बॉन्ड को पूरी तरह खत्म करने का कोई स्पष्ट कानूनी प्रावधान नहीं था, इसलिए प्रशासक के पास ऐसा करने का अधिकार नहीं था।

क्या होते हैं AT-1 बॉन्ड्स?

AT-1 (Additional Tier-1) बॉन्ड्स बैंकों द्वारा अपनी पूंजी बढ़ाने के लिए जारी किए जाने वाले असुरक्षित (unsecured) और स्थायी (perpetual) बॉन्ड होते हैं। बैंक पर गंभीर वित्तीय संकट आने की स्थिति में इनमें निवेश करने वालों का जोखिम सबसे अधिक होता है।