जबलपुर: शैल्बी हॉस्पिटल में आग के बाद फायर सेफ्टी पर उठे सवाल, 30-40% अस्पतालों के पास वैध NOC नहीं
जबलपुर: शहर के शैल्बी हॉस्पिटल (Shelby Hospital) में हुई आगजनी की घटना ने एक बार फिर जिले के अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटरों में मरीजों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। हादसे के बाद स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
30 से 40 फीसदी अस्पतालों में फायर एनओसी नहीं
स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जबलपुर जिले में कुल 179 पंजीकृत निजी अस्पताल और डायग्नोस्टिक सेंटर संचालित हैं। इनमें से 30 से 40 प्रतिशत अस्पताल ऐसे हैं जिनके पास वैध फायर एनओसी (Fire NOC) नहीं है या जिनकी एनओसी की समयावधि (Validity) समाप्त हो चुकी है।
कागजी कार्रवाई तक सीमित जांच और सीलिंग
जिले में हर बड़े हादसे के बाद प्रशासनिक स्तर पर जांच, नोटिस और सीलिंग की खानापूर्ति की जाती है, लेकिन कुछ ही महीनों बाद स्थिति दोबारा पहले जैसी हो जाती है। सख्त निगरानी और सतत कार्रवाई के अभाव में अस्पतालों में आगजनी की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं।
नए नियमों के बावजूद सरकारी अस्पताल भी बेपरवाह
‘मध्य प्रदेश अग्निशमन व आपातकालीन सेवा सामान्य नियम-2026’ के तहत सख्त प्रावधान लागू किए गए हैं:
हर साल 30 जून तक फायर ऑडिट कराना, फायर सुपरवाइजर की नियुक्ति करना और फायर टैक्स जमा करना अनिवार्य है। बिना वैध एनओसी पाए जाने पर ₹5 लाख तक का जुर्माना और अस्पताल को सील करने का प्रावधान है।
इसके बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि न केवल निजी अस्पताल, बल्कि कई सरकारी स्वास्थ्य संस्थान भी खुद इन नियमों का पालन करने में लापरवाही बरत रहे हैं।










