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Adhik Maas Malpua Daan: दरिद्रता से मिलेगी हमेशा के लिए मुक्ति- अधिकमास में क्यों किया जाता है 33 मालपुओं का ही महादान? जानें महत्व, विधि और शुभ मुहूर्त

Adhik Maas Malpua Daan: दरिद्रता से मिलेगी हमेशा के लिए मुक्ति- अधिकमास में क्यों किया जाता है 33 मालपुओं का ही महादान? जानें महत्व, विधि और शुभ मुहूर्त

आध्यात्मिक डेस्क : हिंदू सनातन संस्कृति में ‘अधिकमास’ जिसे ‘पुरुषोत्तम मास’ भी कहा जाता है, भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना और दान-पुण्य के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। क्या आपने कभी सोचा है कि इस पवित्र महीने में 33 मालपुए दान करने की परंपरा क्यों है?Adhik Maas Malpua Daan: दरिद्रता से मिलेगी हमेशा के लिए मुक्ति- अधिकमास में क्यों किया जाता है 33 मालपुओं का ही महादान? जानें महत्व, विधि और शुभ मुहूर्त

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह कोई साधारण दान नहीं बल्कि एक ऐसा ‘महादान’ है, जो इंसान के जीवन से सात जन्मों की दरिद्रता और कंगाली को हमेशा के लिए मिटा सकता है। अगर आप पूरे अधिकमास में यह दान नहीं कर पाए हैं, तो आने वाली अधिकमास की अमावस्या (15 जून 2026, सोमवार) को यह महादान जरूर करें। आइए जानते हैं इसके पीछे का पौराणिक रहस्य और दान करने की सही विधि।

क्यों किया जाता है सिर्फ ’33’ की संख्या में ही मालपुओं का दान?

अधिकमास के दौरान 33 की संख्या में मालपुए दान करने के पीछे एक बेहद गहरा आध्यात्मिक और पौराणिक रहस्य छिपा है:

  • 33 कोटि देवताओं का वास: शास्त्रों के अनुसार, इस ब्रह्मांड में 33 कोटि (प्रकार) के देवी-देवता विद्यमान हैं। अधिकमास के स्वामी स्वयं भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) हैं।

  • एक साथ प्रसन्न होते हैं सभी देव: मान्यता है कि जब कोई श्रद्धालु पूरी श्रद्धा से 33 मालपुओं का दान करता है, तो उसे भगवान श्रीहरि के साथ-साथ सृष्टि के सभी 33 कोटि देवी-देवताओं का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त हो जाता है।

  • अमावस्या पर महाफल: अधिकमास की अमावस्या तिथि पर यह दान करने से पूरे महीने भर की पूजा, तप और यज्ञ का पुण्य फल अकेले इस एक दिन के दान से मिल जाता है। इससे घर के रोग, दोष, कंगाली और नकारात्मक ऊर्जा का पूरी तरह नाश होता है।

33 मालपुए दान करने की प्रामाणिक और सही विधि

शास्त्रों में इस महादान को करने के कुछ खास नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करने से ही पूजा सफल होती है:

  1. कैसा हो बर्तन (पात्र): मालपुओं का दान कांसा (Bronze) के बर्तन में रखकर करना सबसे उत्तम और सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। यदि आपके पास कांसे का बर्तन नहीं है, तो आप इसकी जगह मिट्टी का नया पात्र, पीतल की थाली या फिर बांस की साफ टोकरी का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

  2. कैसा हो मालपुआ: ये मालपुए पूरी तरह शुद्ध होने चाहिए। इन्हें शुद्ध घी, गेहूं के आटे और गुड़ से तैयार किया जाता है (गुड़ न होने पर आप शक्कर या चीनी का इस्तेमाल भी कर सकते हैं)। ध्यान रहे कि गिनती में मालपुए पूरे 33 ही होने चाहिए, न एक कम और न एक ज्यादा।

  3. पूजा और संकल्प: दान करने से पहले अपने घर के मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें। मालपुओं के पात्र को भगवान के सामने रखें। इसके बाद हाथ में जल, अक्षत (चावल) और फूल लेकर मन ही मन संकल्प लें कि “मैं अपने और अपने परिवार के कल्याण, सुख-समृद्धि के लिए अधिकमास का यह महादान करने जा रहा/रही हूँ।”

  4. दक्षिणा और तुलसी दल: भगवान विष्णु की पूजा तुलसी के बिना अधूरी है। इसलिए दान करने वाले पात्र में मालपुओं के साथ तुलसी का पत्ता (तुलसी दल) अवश्य रखें। साथ ही अपनी श्रद्धा के अनुसार कुछ नकद पैसे (दक्षिणा) भी जरूर रखें।

  5. ब्राह्मण को दान: पूजा संपन्न होने के बाद इस पूरे पात्र को आदर सहित किसी योग्य या भूखे ब्राह्मण को दान कर दें। दान देने के बाद ब्राह्मण देव के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लेना न भूलें।

याद रखें यह विशेष तारीख: साल 2026 की इस पावन अधिक अमावस्या का संयोग 15 जून, सोमवार को बन रहा है। इस दिन सुबह स्नान-ध्यान के बाद किया गया यह दान आपकी सोई हुई किस्मत को चमका सकता है और घर में सुख-समृद्धि के द्वार खोल सकता है।

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