
Guru Purnima 2026: अज्ञान का अंधकार दूर करने वाला पावन पर्व; जानिए क्यों गुरु को दिया गया है भगवान से भी ऊंचा दर्जा
भोपाल/इंदौर: भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा का सबसे बड़ा और पवित्र पर्व गुरु पूर्णिमा इस वर्ष 29 जुलाई को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला यह त्योहार हमारे जीवन से अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाने वाले गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है।
ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने इस पावन पर्व का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व साझा करते हुए बताया कि गुरु न केवल शिक्षा प्रदान करते हैं, बल्कि शिष्य के जीवन को सही दिशा और संस्कार भी देते हैं।
महर्षि वेदव्यास की जयंती: इसलिए कहते हैं ‘व्यास पूर्णिमा’
गुरु पूर्णिमा को ‘व्यास पूर्णिमा’ के नाम से भी जाना जाता है:
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महर्षि वेदव्यास का प्राकट्य दिवस: सनातन परंपरा में महान ग्रंथ महाभारत, चार वेदों के विभाग और 18 पुराणों के रचयिता महर्षि वेदव्यास जी का जन्म आषाढ़ पूर्णिमा के दिन ही हुआ था।
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प्रथम गुरु का दर्जा: महर्षि वेदव्यास को मानव जाति का प्रथम गुरु माना जाता है, इसलिए उनके सम्मान में यह दिन गुरु पूजन के रूप में समर्पित किया गया है।
“गुरु गोविंद दोऊ खड़े…” -भारतीय परंपरा में सर्वोच्च स्थान
आचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि भारतीय संस्कृति में गुरु को भगवान से भी ऊपर स्थान दिया गया है, क्योंकि गुरु के बिना ईश्वर प्राप्ति का मार्ग भी संभव नहीं है। यह दिन विशेष रूप से उन सभी गुरुओं, आचार्यों और मार्गदर्शकों के प्रति सम्मान, नमन और पूजन करने का अवसर है, जिन्होंने हमें ज्ञान, संस्कार और जीवन जीने की कला सिखाई है। Guru Purnima 2026: अज्ञान का अंधकार दूर करने वाला पावन पर्व; जानिए क्यों गुरु को दिया गया है भगवान से भी ऊंचा दर्जा








