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छह सूत्रीय मांगों को लेकर शासकीय महाविद्यालयीन शिक्षकों का चरणबद्ध आंदोलन शुरू, काली पट्टी बांधकर जताया विरोध,प्रदेशभर के प्राध्यापक, ग्रंथपाल एवं क्रीड़ा अधिकारी आंदोलन में शामिल, लंबित मांगों के शीघ्र निराकरण की उठाई मांग

छह सूत्रीय मांगों को लेकर शासकीय महाविद्यालयीन शिक्षकों का चरणबद्ध आंदोलन शुरू, काली पट्टी बांधकर जताया विरोध,प्रदेशभर के प्राध्यापक, ग्रंथपाल एवं क्रीड़ा अधिकारी आंदोलन में शामिल, लंबित मांगों के शीघ्र निराकरण की उठाई मांग

कटनी। प्रांतीय शासकीय महाविद्यालयीन प्राध्यापक संघ के केंद्रीय नेतृत्व के आह्वान पर बुधवार से प्रदेशभर के शासकीय महाविद्यालयों में चरणबद्ध आंदोलन की शुरुआत हो गई। आंदोलन के प्रथम चरण में शिक्षकों, ग्रंथपालों एवं क्रीड़ा अधिकारियों ने कार्य करते हुए काली पट्टी बांधकर शासन एवं उच्च शिक्षा विभाग की नीतियों के विरोध में प्रदर्शन किया।

जिला अध्यक्ष डॉ. आर.के. गुप्ता ने बताया कि संघ की 7 जून 2026 को आयोजित साधारण सभा में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया था कि यदि लंबे समय से लंबित मांगों का निराकरण नहीं किया गया तो 1 जुलाई से चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। बार-बार ज्ञापन देने और विभागीय स्तर पर चर्चा के बावजूद मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।

संघ की प्रमुख मांगों में वर्ष 2004 एवं 2005 में नियुक्त बैकलॉग सहायक प्राध्यापकों की परिवीक्षा अवधि नियुक्ति तिथि से दो वर्ष बाद समाप्त मानते हुए उन्हें कैरियर प्रोन्नति का लाभ देने तथा आवश्यक शैक्षणिक योग्यता प्राप्त करने के लिए वर्ष 2028 तक का अवसर प्रदान करने की मांग शामिल है।

इसके अलावा क्रीड़ा अधिकारियों एवं ग्रंथपालों को सहायक प्राध्यापक, सह-प्राध्यापक एवं प्राध्यापक का पदनाम देने, उनकी सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने तथा यूजीसी के प्रावधानों के अनुसार पे मैट्रिक्स-14 का लाभ प्रदान करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है।

संघ ने वर्ष 2009, 2011 एवं 2019 में नियमितीकरण से वंचित सहायक प्राध्यापकों की परिवीक्षा अवधि समाप्त कर कैरियर एडवांसमेंट योजना का लाभ शीघ्र देने, छानबीन समिति की नियमित विषयवार बैठक आयोजित करने तथा पात्र सहायक एवं सह-प्राध्यापकों को पदोन्नति के अनुरूप पदनाम प्रदान करने की मांग की है।

प्राध्यापक संघ ने सेवानिवृत्त शिक्षकों के पेंशन, वेतन निर्धारण, अर्जित अवकाश एवं समूह बीमा के लंबित भुगतान को प्राथमिकता से निपटाने तथा सामान्य प्रशासन विभाग के नियमों के अनुरूप उच्च शिक्षा विभाग की परामर्शदात्री समिति की बैठक शीघ्र आयोजित करने की भी मांग उठाई है। संघ का कहना है कि पिछले लगभग दस वर्षों से परामर्शदात्री समिति की बैठक आयोजित नहीं की गई है।

प्राध्यापक संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शासन द्वारा छह सूत्रीय मांगों का शीघ्र निराकरण नहीं किया गया तो आंदोलन को आगामी चरणों में और अधिक व्यापक एवं प्रभावी बनाया जाएगा।

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