डिजिटल और वित्तीय मोर्चे पर भारतीय महिलाओं की लंबी छलांग; देश में इंटरनेट इस्तेमाल करने वाली महिलाएं हुईं दोगुनी, 89% के पास अपने बैंक खाते
डिजिटल और वित्तीय मोर्चे पर भारतीय महिलाओं की लंबी छलांग; देश में इंटरनेट इस्तेमाल करने वाली महिलाएं हुईं दोगुनी, 89% के पास अपने बैंक खाते
नई दिल्ली: भारतीय समाज में महिलाएं न सिर्फ हर कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, बल्कि उनकी डिजिटल पहुंच और आर्थिक आत्मनिर्भरता में भी क्रांतिकारी सुधार दर्ज किया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी छठी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, देश में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की संख्या में लगभग दोगुनी बढ़त दर्ज की गई है। इसके साथ ही महिलाओं के निजी बैंक खातों और खुद के स्मार्टफोन के आंकड़ों में भी भारी इजाफा हुआ है।
डिजिटल समावेशन: दो साल में दोगुनी हुईं इंटरनेट यूजर महिलाएं
NFHS-6 के सर्वे परिणामों ने देश में तेजी से मिटते ‘डिजिटल डिवाइड’ को साबित किया है इंटरनेट का बढ़ता क्रेज: साल 2019-21 (NFHS-5) के सर्वे में जहां केवल 33.3% भारतीय महिलाओं ने कम से कम एक बार इंटरनेट का इस्तेमाल किया था, वहीं अब (NFHS-6) में यह आंकड़ा बढ़कर 64.3% हो गया है।स्मार्टफोन पर मालिकाना हक: जिन महिलाओं के पास अपना खुद का निजी मोबाइल फोन है, उनकी संख्या भी पिछले सर्वे के 53.9% से बढ़कर अब 63.6% पर पहुंच गई है।
आर्थिक आजादी: 89% महिलाओं के पास बैंकिंग व बचत खाते
वित्तीय साक्षरता और सरकारी योजनाओं (जैसे जनधन खाता व डीबीटी) के चलते महिलाएं आर्थिक रूप से अधिक स्वतंत्र हुई हैं, आंकड़ों के मुताबिक, जिन महिलाओं के पास अपने बैंक या बचत खाते (Saving Accounts) हैं, उनका ग्राफ 78.6% (NFHS-5) से उछलकर अब 89% (NFHS-6) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। इसका मतलब है कि देश की लगभग 90 फीसदी महिलाएं अब बैंकिंग सिस्टम से सीधे जुड़ी हुई हैं।
मासिक धर्म स्वच्छता (Period Hygiene) के प्रति बढ़ी जागरूकता
शारीरिक स्वास्थ्य और स्वच्छता के मोर्चे पर भी देश की युवा पीढ़ी जागरूक हो रही है 15 से 24 वर्ष के आयु वर्ग की युवतियों में पीरियड्स के दौरान साफ-सुथरे और सुरक्षित तरीकों (जैसे सैनिटरी पैड) का इस्तेमाल करने का आंकड़ा 77.6% से बढ़कर 79.2% हो गया है। इस सुधार में केंद्र सरकार की ‘राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम’ के तहत संचालित ‘मासिक धर्म स्वच्छता योजना’ (MHS) और ‘जनऔषधि केंद्रों’ पर मिलने वाले बेहद किफायती सैनिटरी प्रोडक्ट्स ने गेमचेंजर की भूमिका निभाई है।
सतत विकास (SDG) की ओर कदम, लेकिन जीवनशैली की चुनौतियां बरकरार
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, ये नतीजे मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भारत द्वारा सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को हासिल करने की दिशा में सही प्रगति को दर्शाते हैं। हालांकि, रिपोर्ट ने कुछ उभरती हुई चिंताओं की तरफ भी इशारा किया है वयस्कों में कुपोषण के साथ-साथ बढ़ते मोटापे का दोहरा बोझ।जीवनशैली से जुड़े जोखिम और गैर-संक्रामक रोगों (NCDs) में बढ़ोतरी।इन चुनौतियों से निपटने के लिए अब प्रिवेंटिव हेल्थकेयर और संतुलित पोषण रणनीतियों पर ध्यान देने की जरूरत है।
NFHS-5 बनाम NFHS-6: भारतीय महिलाओं की प्रगति रिपोर्ट
| विकास का पैमाना (महिलाएं) | NFHS-5 (2019-21) के आंकड़े | NFHS-6 (ताजा रिपोर्ट) के आंकड़े |
| इंटरनेट का इस्तेमाल | 33.3% | 64.3% (लगभग दोगुना) |
| स्वयं का बैंक/बचत खाता | 78.6% | 89.0% |
| निजी मोबाइल फोन की उपलब्धता | 53.9% | 63.6% |
| मासिक धर्म स्वच्छता (15-24 आयु वर्ग) |













