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आचार संहिता या अघोषित इमरजेंसी ?

अमित झा
जबलपुर। शहर में आचार संहिता लगने के बाद से ही अघोषित इमरजेंसी का माहौल निर्मित हो गया है आलम यह है कि आम आदमी भयभीत नजर आ रहा है। हालांकि चुुनाव पहले भी हुुए है और आचार संहिता भी लगी लेकिन वर्तमान हालात अंग्रेजो के उस षासन की याद दिला रहे है। एक तरफ जहां नवरात्रि का माहौल है वही दूसरी तरफ प्रशासन की सख्ती जिससे आमजन डरा सहमा भयभीत है। ऐसा पहली बार देखने को आया जब जबलपुर बंद के दौरान पुलिस प्रषासन ने फलैग मार्च निकाल दिया जिसको देखकर लोगों को आश्चर्य हुआ क्यंकि जबलपुर बंद पहले भी हुए है लेकिन प्रशासन की सख्ती इस हद तक नही देखी
क्यूं प्रशासन है इतना सख्त
ऐसा नही कि शहर में चुनाव पहली बार हुए है जबलपुर के चुनावों के इतिहास में ऐसी कोई घटना भी नही हुुई है जिसके कारण प्रषासन इतनी सर्तकता बरतता दिखाई दे रहा है बावजूद इसके प्रषासन की सख्ती समझ से परे है।
दुर्गा पण्डालों के बैनर गायब चौराहे सूने
आमतौर पर देखा गया है कि नवरात्र की शुरुआत के साथ ही दुर्गा पण्डालों में बैनर पोस्टरों की होड़ लग जाया करती है लेकिन इस बार ऐसा नजारा देखने नही मिल रहा है। शहर के सभी चौराहें जहां नवरात्र की शुभकामनाओं के साथ पट जाया करते थे वो चौराहे आज सूने नजर आ रहे है।
नवरात्र में वाहन चेकिंग की चक्कलस
गौरतलब है कि शारदेय नवरात्र के मौके पर आकर्षक पण्डालों में विराजित प्रतिमाओं के दर्षन करने लोग बड़ी संख्या में निकलेगें लेकिन पुलिस अधीक्षक के आदेष से षहर के चौराहों में चल रही चेकिंग सिरदर्द बनेगी क्यूंकि चेकिंग के नाम पर वाहन चालकों को परेषान किया जा रहा है।
आचार संहिता ने जनप्रतिनिधियों का मुंह सिला
शहर के जनप्रतिनिधि जो छोटे छोटे विवादों के कारण थाने का घेराव व प्रदर्षन कर दिया करते थे वह भी टिकिट के चक्कर में सबकुछ भूलकर बैठे है कहा तो यह भी जा रहा है कि आचार संहिता के नाम पर पुुलिस इन नेताओं पर केस दर्ज करने का दबाव बनाकर इन्हें षांत कर चुुकी है जिसके बाद प्रशासन ने मनमाना रवैया अपना लिया है।

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