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15 जून के बाद करें धान की रोपाई, जल संरक्षण के लिए अपनाएं डीएसआर : डा. जसविद्र

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धान की रोपाई का सीजन शुरू हो गया है। किसान पनीरी व खेतों की तैयारी में जुटे हुए हैं। ऐसे किसानों की संख्या भी कम नहीं है जो धान की परपंरागत रोपाई से किनारा कर मशीन से सीधी बिजाई को तवज्जो दे रहे हैं। धान की रोपाई को लेकर किसान क्या-क्या सावधानियां बरतें, अच्छी पैदावार के लिए शुरुआती दौर में किन बातों को ध्यान में रखें और खेतीबाड़ी से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर दैनिक जागरण संवाददाता ने कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डा. जसविद्र सैनी से बातचीत की। बातचीत के अंश इस प्रकार हैं :-

सवाल : धान की रोपाई को लेकर किसान तैयारी कर रहे हैं। जिले में कितने एरिया में रोपाई का लक्ष्य है। कब से रोपाई करना फायदेमंद हैं। जवाब : जिला में 70 हजार हेक्टेयर जमीन पर धान की रोपाई का लक्ष्य है। किसान 15 जून के बाद रोपाई शुरू कर सकते हैं।

सवाल : लू के कारण धान की पनीरी प्रभावित हो रही है। बचाव के लिए क्या करें। बचाव : लू से बचाव के लिए किसान रात के समय धान की पनीरी की सिचाई करें। सुबह पानी निकाल दें। क्योंकि धूप में पानी गर्म होने से नुकसान होता है। यूरिया की मात्रा संतुलित रखें। यदि पीलापन है तो जिक व यूरिया का स्प्रे किया जा सकता है। सवाल : धान की रोपाई के समय किन-किन बातों का ध्यान रखें ताकि पैदावार अच्छी हो।

जवाब : रोपाई के लिए पनीरी गीले खेत में ही उखाड़ें। क्योंकि 1121 व 1509 बकानी की समस्या अधिक रहती है। यदि गीले में उखाड़ेंगे तो यह समस्या नहीं रहेगी। रोपाई के दूसरे या तीसरे दिन डीएपी डाल दें। 72 घंटे के अंदर खरपतवार नाशक अवश्य डाल दें। जवाब : धान की सीधी रोपाई की क्या स्थिति है? प्रोत्साहन के लिए विभागीय स्तर पर क्या प्रयास किए जा रहे हैं।

जवाब : धान की सीधी बिजाई को लेकर इस बार काफी जागरूकता है। चार हजार एकड़ बिजाई का लक्ष्य रखा गया है। करीब 2500 एकड़ पर बिजाई हो चुकी है। सवाल : धान की सीधी बिजाई करने से खरपतवार की समस्या रहती है।

जवाब : नहीं ऐसा नहीं है। यदि बिजाई के 72 घंटे के अंदर खरपतवार नाशक का छिड़काव कर दें तो खरपतवार की समस्या नहीं रहेगी। सवाल : जल स्तर में लगातार काफी गिरावट आ रही है। ऐसे में धान की बजाय कौन सी वैकल्पिक फसलों की बिजाई पर जोर दिया जा रहा है।

जवाब : जल स्तर में सुधार के लिए धान की बजाय वैकल्पिक फसलों की बिजाई पर जोर दिया जा रहा है। किसान मूंग, उड़द, अरहर व मक्का की बिजाई कर सकते हैं। मेरा पानी मेरी विरासत योजना के तहत सात हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से अनुदान राशि दी जा रही है। यदि कोई भी फसल खेत में न उगाए तब भी सात हजार रुपये मिलेंगे। सवाल : इन दिनों गन्ने की फसल में काली कीड़ी का प्रकोप अधिक देखा जाता है। बचाव के लिए किसान क्या कर सकते हैं।

जवाब : इन दिनों काली कीड़ी की समस्या देखी जा रही है। बारिश यदि होती है तो यह समस्या खुद ही दूर हो जाएगी। क्लोरोपेरीफोर्स 50 प्रतिशत 500 एमएल के साथ डाईक्लोरोवास 76 प्रतिशत का 250 एमएल मिलाकर गन्ने की फसल पर स्प्रे करें तो काली व भूरी कीड़ी तुंरत नष्ट हो जाएगी। सवाल : प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ लेने के लिए किसान क्या करें।

जवाब : फसल का बीमा करवाने के लिए अंतिम तारीख 31जुलाई जुलाई है। ऋणी किसान 24 जुलाई तक संबंधित बैंक में लिखकर दें कि मै बीमा नहीं कराना चाहता। सवाल : सीजन में यूरिया की किल्लत न हो, इसके लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं।

जवाब : यूरिया व डीएपी का पर्याप्त स्टॉक है। 3100 एमटी डीएपी पड़ा है। यूरिया खाद का भी पर्याप्त स्टॉक है।

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