हमीदुल्ला संपत्ति विवाद: नवाब के परिवार से कोर्ट ने कहा, क्यों न जमीन सरकारी घोषित कर दें
भोपाल। भोपाल नवाब हमीदुल्ला खान का संपत्ति विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब कोर्ट ने नवाब खानदान की चिकलोद स्थित 1800 एकड़ जमीन और संपत्तियों में से 54 एकड़ जमीन को छोड़कर बची हुई अन्य सभी संपत्तियों को सीलिंग के दायरे में लाकर सरकारी घोषित करने का प्रारंभिक आदेश जारी कर दिया है। यह आदेश 25 जुलाई को अपर आयुक्त एचएस मीणा ने जारी किया है।
वहीं सभी पक्षकारों और नवाब के वारिसानों को एक माह का समय दावे-आपत्तियां पेश करने के लिए दिया है। इधर, नवाब परिवारों की ओर से वकीलों का कहना है कि जो आदेश रूपी नोटिस प्राप्त हुआ है उसके तहत एक माह में आपत्तियां पेश की जाएंगी। जरूरत पड़ी तो राजस्व मंडल कोर्ट, हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट तक में चुनौती दी जाएगी।
दरअसल, आयुक्त एचएस मीणा ने नोटिस भेजकर नवाब पटौदी के वारिस शर्मिला टैगोर, सैफ अली खान, सोहा और सबा के साथ पटौदी की दो बहन और उनके बच्चों को 20 जुलाई को अपर आयुक्त कोर्ट में अपना पक्ष रखने को कहा।
20 जुलाई को नवाब पटौती के वारिसों के वकील पेश हुए थे और उन्होंने कहा था कि वे मई 2019 में हुई सुनवाई के दौरान जवाब पेश कर चुके हैं और इस मामले में बहस भी हो चुकी है। वहीं 23 जुलाई को नवाब पटौदी की बहन सालेहा और सबीहा के वारिसों की ओर से वकील ने आपत्तियों के बाद अगले दिन लिखित बहस भी पेश की। 25 जुलाई को कोर्ट ने सभी आपत्तियों को खारिज करते हुए प्रारंभिक आदेश जारी कर दिया।
यह है नवाब की चिकलोद स्थित संपित्त्त का विवाद
करीब दो साल पहले भोपाल, सीहोर और रायसेन जिले में स्थित 4000 एकड़ जमीन के नामांतरण का मामला सामने आने के बाद तत्कालीन अपर आयुक्त राजेश जैन ने मामले को स्वप्रेरणा निगरानी में लेते हुए वर्ष 1971 के राजस्व रिकार्ड को खंगलवाया था। क्योंकि वर्ष 1961 में सीलिंग एक्ट आ गया था। इसके तहत कोई भी व्यक्ति जिसके पास 54 एकड़ से ज्यादा जमीन थी उसे दायरे में लाया गया था। इसी एक्ट के तहत भोपाल नवाब की निजी 133 प्रॉपर्टी को छोड़कर सबको इसके दायरे में ले लिया गया था। लेकिन अफसरों की गलती के चलते कुछ जमीनें सरकार के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पाई थीं। इसमें भोपाल की जमीन भी शामिल है। इसके चलते नवाब की चिकलोद स्थित 1800 एकड़ संपत्ति को सीलिंग एक्ट के दायरे में लिया गया है। सुमेरमल बाफना लॉर्ड होटल और फिरदौस एग्रो यानि बाफना ग्रुप के वकील का कहना है कि उन्होंने नवाब परिवार से 1984 से जमीन लीज पर ली थी। हालांकि नवाब परिवारों की ओर से कहा जा रहा है कि लीज पर दी गई संपत्ति की अवधि समाप्त हो गई है।








