Site icon Yashbharat.com

सरकारी अस्पताल में मदद के नाम पर बिचौलिए कर रहे गुमराह


जबलपुर, प्रतिनिधि। मरीजों को सरकारी अस्पताल में मदद के नाम पर बिचौलिए गुमराह कर रहे हैं। शुरुआती दौर में यह भरपूर मदद करते हैं और अस्पताल की बदहाली का हाल सुना कर उन्हें गुमराह करते हैं, इसके बाद उन्हें सलाह दी जाती है कि वे फलां अस्पताल में अपना इलाज कराएं जहां अत्यंत कम पैसों में अच्छा इलाज कर दिया जाएगा। राज्य बीमारीसहायता और प्रधानमंत्री कल्याण कोष से इलाज के पैसे पर इन निजी अस्पतालों द्वारा डाका डाला जाता है इन मरीजों को नहीं मालूम होता है कि इनके कार्ड से कितने रुपए निकाल लिए गए और जब उसे जानकारी लगती है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।

दलालों के चक्कर में फंसकर मरीज लुटने को मजबूर हैं। पूर्व में सामने आए कई मामलों में यह देखा गया है कि, सरकारी अस्पतालों में दलाल
मरीजों को नर्सिंग होम पहुंचाते हैं तो उन्हें एक
मरीज के बदले हजार रुपए मिलते हैं। कई डॉटर
सरकारी ओपीडी में इलाज करते हैं और मरीज की
जांच निजी पैथोलॉजी में कराते हैं । जननी सुरक्षा
एसप्रेस के चालक और आशा कार्यकर्ताओं पर भी
महिलाओं को निजी अस्पताल पहुंचाने के आरोप
लगते रहे हैं। लेकिन रसूख के चलते इन पर
लगाम नहीं लगाई जा पा रही है।
बिचौलियों के मायाजाल में फंसा मरीज
मेडिकल कॉलेज में
अव्यवस्थाओं का आलम
जबलपुर, मुनप्र। नागौद जिला
सतना निवासी एक व्यक्ति पिछले
दिनों सड़क दुर्घटना में घायल हो
गया था। उसके सिर में गंभीर चोटें
आयी थीं और उसे यहां लाकर
मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में
भर्ती कराया गया है। कुछ दिन तक
तो उसका इलाज वार्ड क्रमांक 13
मे चलता रहा लेकिन बाद में उसे
वार्ड से बाहर कर बरामदे में डाल
दिया। इतना ही नहीं मेडिकल
कॉलेज चिकित्सालय के द्वारा उसे
बिस्तर तक नसीब नहीं हुए। बहोरी
नामक यह मरीज घर जो कपड़े
लाया था उन्हीं के सहारे बरामदे में
सोने के लिए विवश है। मेडिकल में
अव्यवस्थाओं का या आलम है
इसका अंदाजा इसी से लगाया जा
सकता है कि मेडिकल के डाटर
घायल के परिजनों को निजी
अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह
दे रहे हैं। घायल की एमआरआई भी
हो चुकी है और उसके आठ सौ रुपए
भी घायल के द्वारा कर दिये गये।
मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में
एक ओर अव्यवस्था है यहां पर निजी
अस्पतालों के दलाल घूमते रहते हैं
जो बाहर से आने वाले मरीजों को
बरगलाकर निजी अस्पतालों में
बेहतर उपचार का सपना दिखाकर
मरीज को मेडिकल से डिस्चार्ज कर
निजी अस्पताल ले जाने की सलाह
देते हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि
मेडिकल के चिकित्सक भी इस
मामले में चुप्पी साधे रहते हैं।
मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में
यह कोई नया मामला नहीं है। पूर्व में
भी अनेक मरीजों को वार्ड से बाहर
कर शेड के नीचे डाल दिया जाता है
और फिर उनकी सुध लेने वाला कोई
नहीं रहता। कई मरीज तो शैड के
अंदर पड़े पड़े ही दम तोड़ देते हैं।
घर से लाये गद्दे पर जमीन पर सोने विवश हैं घायल
जबलपुर। नगर निगम द्वारा
माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर
के द्वारा पारित आदेश के परिपालन
में मदन महल, पहाड़ी एवं उसके
आस पास के पहाड़ी क्षेत्रों से
लगभग 1418 अतिक्रमणों को
हटाकर पहाडी क्षेत्रों को अतिक्रमण
मुक्त करने का कार्य किया जा चुका
है। शेष अतिक्रमणों को हटाने का
अभियान तेजगति से जारी है।
अतिक्रमण हटाने के संबंध में
निगमायुक्त श्री चन्द्रमौलि शुल ने
बताया कि माननीय न्यायालय के
आदेशों के अनुपालन में अभी तक
तीन चरणों की कार्रवाई में 1418
से अधिक अवैध निर्माण एवं 9
धार्मिक स्थलों को आपसी सहमति
के आधार पर हटाये जा चुके हैं।
उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई तेज
गति से प्रतिदिन जारी है। आज 137
मकानों को तोड़कर 120 लोगों को
विस्थापन पर्ची वितरित कर 156
अतिक्रमणों को चिन्हित करने का
कार्य किया गया। निगमायुक्त ने
बताया कि अब सूपाताल की तरह
चौहानी एवं आस पास के पहाड़ी
क्षेत्रों को भी शीघ्र ही अतिक्रमण
मुक्त कर दिया जायेगा। उन्होंने
बताया कि नगर निगम द्वारा
अतिक्रमण हटाने का अभियान
शतत् रूप से जारी है। निगमायुकत
श्री शुल ने बताया कि आज 137
अतिक्रमणों को हटाने के साथ साथ
6 धार्मिक स्थल भी सहमति के
आधार पर हटाये गए। कार्रवाई के
संबंध में उपायुक्त श्री राकेश अयाची
ने बताया कि प्रथम चरण में 765
अवैध मकान तोड़े गए थे, दूसरे
चरण में 93 और तीसरा चरण
प्रारंभ जिसके अंतर्गत 560
अतिक्रमणों को हटाया गया है, शेष
पर कार्रवाई जारी है। इस अवसर पर
एस.डी.एम. श्रीमती मनीषा
बास्कले, उपायुक्त श्री राकेश
अयाची, सी.एस.पी. श्री हंसराज
सिंह, श्री अर्जुन उईके, थाना प्रभारी
श्री शफीक खान, अधीक्षक श्री
नरेन्द्र राजपूत, दल प्रभारी श्री नरेन्द्र
कुशवाहा, श्री राजू रैकवार, श्री
लक्ष्मण कोरी, श्री मुकेश पारस,
मुन्ना, एहसान खान, बमबम तिवारी
आदि उपस्थित रहे।
अब तक 1418 अतिक्रमणों को हटाकर
इन जांचो का कोई अता पता नहीं
पांडे हॉस्पिटल में एक मरीज को अच्छा इलाज ना मिलने के मामले की न्यायिक जांच शुरू की गई थी एसडीएम को
जांच का जिमा सौंपा गया था। उनके साथ सीएमएचओ सिविल सर्जन व 1 मनोनीत डॉटर की टीम भी जांच कर रही
थी। जिसके बाद डॉटरों के कई संगठन मामले को मैनेज करने में जुट गए और कई नामचीन डॉटर भी कलेटर
से मिलने पहुंचे थे।

  1. जननी सुरक्षा एसप्रेस कटनी के चालक ने 8 अटूबर को उमरिया की आदिवासी महिला को
    डिलीवरी के लिए सुधा नर्सिंग होम पहुंचाया था। बच्चे की मौत के बाद महिला को बंधक बना लिया गया
    था जांच जारी है।
  2. मेडिकल में तैनात डॉ एन के सिंह ने गोली लगने से घायल मरीज का निजी अस्पताल में ऑपरेशन
    किया था मामला सामने आया तो जांच हुई प्रकरण में डॉटर के खिलाफ आरोप तय हुए थे।
  3. मझौली के उदय भान सिंह की पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर जननी सुरक्षा एसप्रेस का सहारा
    लिया गया चालक ने रात में ही रास्ते में पैसे मांगे । डिलीवरी के बाद बच्चे की मौत हो गई ।
    कार्रवाई के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ।
  4. विटोरिया अस्पताल के डॉटर ने एक मरीज का ऑपरेशन राइट टाउन स्थित निजी अस्पताल
    में किया । भुगतान को लेकर शिकायत हुइ
Exit mobile version