शीशम की एक ही लकड़ी से बनी है ‘कोदंड श्री राम’ की आदमकद प्रतिमा, जानिए खास बातें
लखनऊ। अयोध्या में कोदंड श्रीराम की सात फुट ऊंची आदमकद प्रतिमा शुक्रवार को अयोध्या शोध संस्थान में प्रतिष्ठित की जाएगी। तमिलनाडु में इस प्रतिमा को शीशम की लकड़ी के एक बड़े टुकड़े से बनाया गया है। तीन साल की मेहनत के बाद तैयार हुई इस मूर्ति को संस्थान ने कर्नाटक सरकार के उपक्रम ‘कावेरी’ से 35 लाख रुपए में खरीदा है।
बताया जा रहा है कि इस प्रतिमा को तैयार करने वाले कलाकार को हस्त शिल्प के लिए राष्ट्रपति सम्मान मिल चुका है। भगवान राम के धनुष का नाम कोदंड है, इसलिए इस प्रतिमा का नाम कोदंड श्रीराम रखा गया है। दक्षिण भारत में भगवान राम के कोदंड रूप यानी हाथ में धनुष-बाण लिए हुए स्वरूप की विशेष तौर पर पूजा की जाती है। महिलाएं श्रीराम के इस स्वरूप को आदर और सम्मान देती हैं क्योंकि वह स्त्री के सम्मान के लिए रावण से भिड़ गए थे।
दरअसल, जब रावण ने सीता-माता का अपहरण कर लिया था, तो उनकी तलाश करते हुए भगवान राम हाथ में धनुष कोदंड लिए दक्षिण भारत पहुंचे थे। यहीं से उन्होंने रावण के विरुद्ध युद्ध का बिगुल फूंक दिया था और उसका संहार करके सीता मां को सुरक्षित वापस लाए थे। इसलिए दक्षिण भारत में उन्हें ‘स्त्री रक्षक’ के रूप में पूजा जाता है।
‘कोदंड’ का अर्थ होता है बांस से निर्मित। भगवान श्रीराम का कोदंड एक चमत्कारिक धनुष था। कोदंड नाम से भिलाई में एक राम मंदिर ‘कोदंड रामालयम मंदिर’ भी है। भगवान श्रीराम दंडकारण्य में 10 वर्ष तक भील और आदिवासियों के बीच बिताए थे।
रामायण में कई जगहों पर हुआ है कोदंड का जिक्र
कोदंड कठिन चढ़ाइ सिर जट जूट बांधत सोह क्यों।
मरकत सयल पर लरत दामिनि कोटि सों जुग भुजग ज्यों॥
कटि कसि निषंग बिसाल भुज गहि चाप बिसिख सुधारि कै।
चितवत मनहुँ मृगराज प्रभु गजराज घटा निहारि कै॥
भावार्थ – कठिन धनुष चढ़ाकर सिर पर जटा का जूड़ा बांधते हुए प्रभु कैसे शोभित हो रहे हैं, जैसे मरकतमणि (पन्ने) के पर्वत पर करोड़ों बिजलियों से दो सांप लड़ रहे हों। कमर में तरकस कसकर, विशाल भुजाओं में धनुष लेकर और बाण सुधारकर प्रभु राम राक्षसों की ओर देख रहे हैं। मानो मतवाले हाथियों के समूह को आता देखकर सिंह उनकी ओर ताक रहा हो।
धरइ जो बिबिध देह सुरत्राता। तुम्ह से सठन्ह सिखावनु दाता॥
हर कोदंड कठिन जेहिं भंजा। तेहि समेत नृप दल मद गंजा॥
भावार्थ – जो देवताओं की रक्षा के लिए नाना प्रकार की देह धारण करते हैं और जो तुम्हारे जैसे मूर्खों को शिक्षा देने वाले हैं, जिन्होंने शिवजी के कठोर धनुष को तोड़ डाला और उसी के साथ राजाओं के समूह का गर्व चूर्ण कर दिया॥

