Tuesday, May 12, 2026
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शहर में गली गली हथियार के सौदागर

बड़ी आसानी अपराधियों को अवैध हथियारों की हो रही सप्लाई
जबलपुर प्रतिनिधि। शहर का नाम देशभर में तब उछला जब सीओडी फैक्ट्री कर्मी द्वारा एके 47 का मामला सामने आया। आतंकी समूहों सहित बिहार, उत्तरप्रदेश के नामी बदमाशों द्वारा हथियार खरीदने की बातें सामने आयी। जिसकी जांच एनआईए द्वारा जारी है। हथियार सौदागरों के जबलपुर से कनेक्षन की बात सामने आते ही सभी जांच एजेंसियों के कान जहां खड़े कर दिए वही जबलपुर पुलिस अभी भी सो रही है। यूं तो यदा कदा कार्रवाई के नाम पर एकाद हथियार तस्कर पुलिस की गिरफ्त में आ जाता है जिसकी प्रेस कॉन्फेंस कर पुलिस अपनी पीठ थपथपाकर वाहवाही लूटती नजर आती है। जबकि वास्तविक स्थिति यह है कि शहर के बदमाशों तक ये हथियार आज भी बड़ी आसानी से आज भी उपलब्ध हो रहे है। बेखौफ बदमाश इन हथियारों का उपयोग अपराधिक वारदातों में कर रहे है।
यूपी, दमोह सहित बिहार से आ रही हथियारों की खेप
कई मामलों में देखा जा रहा है कि शहर के बदमाशों तक अवैध हथियारों की खेंप यूपी, बिहार और मध्यप्रदेश के दमोह से भारी मात्रा में आ रही है। पुलिस द्वारा जांच में आए इस तरह के मामलों में केवल हथियार तस्कर और हथियार खरीदने वालों पर ही कार्रवाई की जाती है जबकि हथियार के बड़े सौदागर पुलिस की पकड़ से दूर नजर आते है।
आसानी से मिल रहे घातक हथियार
शहर के बदमाशों तक अवैध घातक हथियार बड़ी आसानी से पहुंच रहे है। इन आसामाजिक तत्वों से ये हथियार सौदागर लगातार सम्पर्क बनाए रहते है और बिना किसी जांच के शहर में ही इन घातक हथियारों की सप्लाई की जाती है।
देशी तमंचा से लेकर अत्याधुनिक हथियार मिलना सुलभ
कई मामलों में देखने में आया है कि शहर के अपराधियों के पास देशी कट्टा सहित माउजर और अन्य अत्याधुनिक हथियार बड़ी ही आसानी से मिल जाया करते है। कुछ वर्षो पूर्व नरसिंहपुर क्षेत्र के राकई गांव से पकड़े गए हथियार इसका जीता जागता उदाहरण है जब भारी मात्रा में शहर के अपराधी से पकड़े गए अत्याधुनिक हथियार देखकर पुलिस ने दांतों तले उंगलियां दबा ली थी।
पुलिस का मुखबिर तंत्र की असफल
हथियार तस्करों पर नकेल कसने में पुलिस की असफलता का कारण बहुत हद तक मुखबिर तंत्र का फेल होना कहा जा सकता है। अभी तक इन मुखबिरों के माध्यम से ऐसी कोई बड़ी सफलता हाथ नही लगी जब कोई बड़ा हथियार तस्कर पुलिस के हत्थें चढ़ा हो।
गेंगवार की आशंका
शहर के वांछित लोगों द्वारा जमा किये जा रहे हथियारों से किसी गेंगवार या किसी बड़ी वारदात की आशंका से इंकार नही किया जा सकता है। बड़े स्तर पर सामने आ रही हथियार तस्करी के मामले सामने आने से इस संभावना को और बल मिलता प्रतीत हो रहा है।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम

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