अजब गजब

दहेज प्रथा ऐसी भी- दूल्हा 12 रुपए शगुन देकर घर लाता है दुल्हन

बांका। बिहार के बांका में रहने वाले संताल आदिवासियों में दहेज प्रथा नहीं है। उल्टे बहू को घर लाने के लिए वर पक्ष द्वारा शगुन के तौर पर वधू पक्ष को 12 रुपए देने की परंपरा है। इस समाज में लंबे समय से यह परंपरा चली आ रही है। वे सिर्फ सुशील, संगीत-नृत्य में पारंगत और कर्मठ बहू की चाहत रखते हैं। वे मानते हैं कि पिता के लिए कन्यादान ही सबसे बड़ा दान है। इतना ही नहीं शादी के लिए लड़की के घर आने वाले बरात का खर्च भी वर पक्ष ही उठाता है।2018 3image 11 37 363789840shadi ll

यहां के संताल आदिवासी समाज में आज भी युवक-युवतियों के कुछ समय के लिए एक साथ रहने व एक-दूसरे को समझने की परंपरा कायम है। बुजुर्गों का मानना है कि इससे युवक-युवतियों को शादी के पूर्व कुछ दिनों तक एक साथ समय बिताकर एक-दूजे को समझने का मौका मिलता है।shadi

इसके बाद रीति-रिवाज के साथ परिणय सूत्र में बंधने पर उनका संबंध अधिक टिकाऊ होता है। यही नहीं इनके समाज में लिव इन रिलेशन को भी मान्यता है। जयपुर क्षेत्र में कई ऐसे जोड़े देखे जा सकते हैं, जो बिना शादी किए बाल-बधाों के साथ सुखी जीवन बिता रहे हैं। ग्राम प्रधान श्यामलाल टुडू ने बताया कि अब भी बहू लाने के लिए लड़की वालों को 12 रुपए नकद बतौर शगुन दिया जाता है।

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