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Moon Impact 2026: 5 अगस्त दोपहर 12:05 बजे चांद से टकराया अनियंत्रित स्पेस-एक्स का रॉकेट; वैज्ञानिकों को मिला रिसर्च का बड़ा मौका

अंतरिक्ष में महा-धमाका: चंद्रमा से टकराया स्पेस-एक्स (SpaceX) रॉकेट का बूस्टर; सतह पर बना विशाल क्रेटर

Moon Impact 2026: 5 अगस्त दोपहर 12:05 बजे चांद से टकराया अनियंत्रित स्पेस-एक्स का रॉकेट; वैज्ञानिकों को मिला रिसर्च का बड़ा मौका

वाशिंगटन/नई दिल्ली: अंतरिक्ष के इतिहास में आज एक दुर्लभ खगोलीय घटना घटी है। जनवरी 2025 से अंतरिक्ष में अनियंत्रित तैर रहा स्पेस-एक्स (SpaceX) के फैल्कन-9 रॉकेट का एक विशालकाय टुकड़ा (दूसरा स्टेज) आखिरकार बुधवार, 5 अगस्त 2026 को चंद्रमा की सतह से जा टकराया।

भारतीय समयानुसार दोपहर 12 बजकर 05 मिनट पर हुई इस टक्कर की रफ्तार लगभग 8,690 किलोमीटर प्रति घंटा थी। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस टक्कर के कारण चंद्रमा पर एक नया गड्ढा (Crater) बन गया है और वहां धूल का भारी गुबार उठा है।

 स्कूल बस जितना बड़ा और 4,000 किग्रा भारी था मलबा

स्पेस-एक्स का यह मलबा जनवरी 2025 में ‘फायरफ्लाई एयरोस्पेस’ (Firefly Aerospace) के लूनर लैंडर को चंद्रमा की ओर ले जाने वाले मिशन का हिस्सा था।

  • वजन और आकार: इस रॉकेट स्टेज का आकार लगभग एक स्कूल बस जितना बड़ा और वजन करीब 4,000 किलोग्राम था।

  • अंतरिक्ष में क्यों अटका?: आम तौर पर रॉकेट के निचले हिस्से कक्षा में पेलोड छोड़ने के बाद पृथ्वी के वायुमंडल में गिरकर जल जाते हैं या समुद्र में गिरते हैं। लेकिन लूनर मिशन में अत्यधिक थ्रस्ट (जोर) की जरूरत के कारण यह बूस्टर पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से दूर अंतरिक्ष में बिना किसी निश्चित दिशा के तैरता रह गया था।

 धरती से क्यों नहीं दिखी यह टक्कर?

‘द गार्डियन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, रॉकेट का यह टुकड़ा चंद्रमा के पश्चिमी किनारे पर स्थित आइंस्टीन क्रेटर (Einstein Crater) के पास टकराया है।

  • चंद्रमा के उस हिस्से में होने और अत्यधिक दूरी के कारण इस घटना को पृथ्वी से नंगी आंखों (बिना वैज्ञानिक टेलीस्कोप के) देखना असंभव था।

  • धरती के लिए कोई खतरा नहीं: वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि इस टक्कर से पृथ्वी या उसके पर्यावरण को कोई खतरा नहीं है।

 वैज्ञानिकों के लिए अध्ययन का बड़ा मौका

खगोलशास्त्रियों और अंतरिक्ष एजेंसियों के लिए यह दुर्घटना अध्ययन का एक बड़ा अवसर बनी है। वैज्ञानिक अब इस घटना के जरिए यह समझ सकेंगे कि:

  1. मानव निर्मित (कृत्रिम) वस्तुएं जब अत्यधिक गति से खगोलीय पिंडों से टकराती हैं, तो क्या प्रभाव पड़ता है।

  2. चंद्रमा की ऊपरी सतह (Regolith) की संरचना कैसी है।

  3. इसके साथ ही भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए ‘स्पेस डेब्रिस’ (अंतरिक्ष के कचरे) पर नजर रखने के प्रयासों को तेज करने में मदद मिलेगी।

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