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तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव आने की सम्भावना

जालंधर। 2जी घोटाले में डी.एम.के. के नेताओं के बरी होने के बाद तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव आने की  सम्भावना जताई जा रही है, जिससे भाजपा का गणित गड़बड़ा सकता है।

 

भाजपा के लिए अब ए.डी.एम.के. या डी.एम.के. में से किसी एक को चुनना काफी मुश्किल साबित होगा। इस फैसले से डी.एम.के. को  2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में फायदा मिल सकता है। डी.एम.के. के दोनों नेताओं के बरी होने से भाजपा द्वारा तमिलनाडु में उससे गठबंधन करने के आसार बन रहे थे लेकिन रविवार को आए विधानसभा उपचुनाव के नतीजे से भाजपा एक बार फिर अपनी रणनीति पर सोचने को मजबूर होगी।
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रविवार को आए आर.के. नगर विधानसभा सीट पर दिनाकरण की जीत के बाद तमिलनाडु की राजनीति में ए.डी.एम.के. के शशिकला धड़े का प्रभाव बढऩे का अनुमान है। तमिलनाडु की राजनीति में दिनाकरण धड़े का उभार भाजपा के लिए फायदे का सौदा नहीं हैं क्योंकि भाजपा को लग रहा था कि आने वाले लोकसभा चुनाव में डी.एम.के. एकतरफा जीत हासिल कर सकती है।

 

2016 के  विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 86 सीटें जीत कर शानदार वापसी भी की है। 2011 के चुनाव में पार्टी को महज 23 सीटें मिली थीं। इसी चुनाव में आर.के. नगर सीट पर डी.एम.के. के उम्मीदवार को 57673 वोट मिले थे लेकिन यह रविवार को कम होकर 24651 वोट रह गए हैं। माना जा रहा था कि ए.डी.एम.के. में पड़ी फूट का फायदा डी.एम.के. को होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
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सत्ता के दौरान भाजपा के लिए सबसे बुरा रहा पिछला सप्ताह
2014 में सत्ता संभालने के बाद भाजपा के लिए राजनीति के लिहाज से बीता सप्ताह अब तक का उसका सबसे बुरा सप्ताह रहा। सप्ताह के पहले दिन सोमवार को आए गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजों ने पार्टी को पहला झटका दिया और हफ्ते का समापन भी भाजपा को तमिलनाडु में मिले सियासी झटके से हुआ। हालांकि पार्टी ने रविवार को आए 5 विधानसभा सीटों के उपचुनाव में से 3 सीटों पर जीत हासिल कर ली, लेकिन तमिलनाडु की आर.के. नगर सीट के उपचुनाव में पार्टी को मिले वोट नोटा से भी कम रहे। इसी सप्ताह आए 2जी घोटाले के फैसले ने भी भारतीय जनता पार्टी को तगड़ा झटका दिया।
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इस मामले में अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। मामले के फैसले के बाद कांग्रेस को भाजपा के खिलाफ आक्रामक रुख अख्तियार करने का मौका मिला और कांग्रेस के नेता कपिल सिब्बल ने 2जी घोटाले के बाद रखी गई अपनी ‘जीरो लॉस’  थ्यूरी को सही बताया।

 

भाजपा पर इस बात को लेकर भी सवाल उठे कि पार्टी के सत्ता में रहते सी.बी.आई. के अफसर अदालत में इस घोटाले को प्रमाणित नहीं कर पाए, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इसे घोटाला मानते हुए 122 लाइसैंस रद्द कर दिए थे।
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हिमाचल में भी सिरदर्दी बढ़ी
हालांकि भाजपा ने हिमाचल प्रदेश में स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया लेकिन पार्टी के सी.एम. पद के उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल के चुनाव हारने के बाद पैदा हुई स्थिति से निपटने में भाजपा को एक हफ्ता लग गया। इस दौरान पार्टी के अलग-अलग धड़े आपस में एक-दूसरे के खिलाफ सियासी साजिश और प्रदर्शन करते रहे। पार्टी हाईकमान को प्रदेश में बड़ी जीत के बावजूद राज्य के नेताओं को समझाने में ही एक हफ्ता लग गया और हिमाचल जीत के बावजूद भाजपा के लिए सिरदर्द बना रहा।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम

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