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डॉक्टर की डिजिटल पहचान के कथित दुरुपयोग का मामला सवाल सिर्फ प्रतिष्ठा का नहीं, मरीजों के भरोसे का भी,डॉक्टर की पहचान के कथित दुरुपयोग का गंभीर मामला, मरीजों के भरोसे से भी जुड़ा सवाल

डॉक्टर की डिजिटल पहचान के कथित दुरुपयोग का मामला सवाल सिर्फ प्रतिष्ठा का नहीं, मरीजों के भरोसे का भी,डॉक्टर की पहचान के कथित दुरुपयोग का गंभीर मामला, मरीजों के भरोसे से भी जुड़ा सवा

कटनी। शहर में एक प्रतिष्ठित चिकित्सक दंपति के नाम, मोबाइल नंबर, फोटो और पेशेवर पहचान का कथित तौर पर बिना अनुमति ऑनलाइन इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आया है। मामला केवल किसी डॉक्टर की प्रतिष्ठा या डिजिटल पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर मरीजों के भरोसे, सही चिकित्सक तक पहुंच और संभावित चिकित्सकीय जोखिम से जुड़ा हुआ है। मामले में चिकित्सक दंपति ने पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा को लिखित शिकायत देकर जांच और वैधानिक कार्रवाई की मांग की है।

जयप्रकाश वार्ड, नई बस्ती स्थित रंजन हॉस्पिटल के प्रबंधक एवं करीब 26 वर्षों से चिकित्सा सेवा दे रहे डॉ. राकेश रंजन और उनकी पत्नी डॉ. अनीता रंजन का आरोप है कि Google, Lybrate, Justdial, Facebook और Instagram सहित विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उनकी अनुमति के बिना उनके नाम, मोबाइल नंबर, फोटो एवं प्रोफेशनल प्रोफाइल का इस्तेमाल किया जा रहा है। शिकायत के अनुसार, इन प्लेटफॉर्म्स पर डॉ. राकेश रंजन को मां दुर्गा हॉस्पिटल से संबद्ध चिकित्सक के रूप में प्रदर्शित किया जा रहा है तथा परामर्श शुल्क भी दर्शाया गया है।

 

नाम किसी और का, इलाज किसका—यही सबसे गंभीर सवाल

मामले की गंभीरता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि आज बड़ी संख्या में मरीज किसी विशेष चिकित्सक के नाम, अनुभव और विशेषज्ञता पर भरोसा करके ही अस्पताल या क्लीनिक तक पहुंचते हैं। ऐसे में यदि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर किसी प्रतिष्ठित डॉक्टर का नाम और मोबाइल नंबर देखकर मरीज यह मान ले कि संबंधित चिकित्सक उसी अस्पताल में उपलब्ध हैं और वहां पहुंचने पर उनकी जगह कोई दूसरा चिकित्सक मरीज को देखता है, तो यह स्थिति भ्रम, गलत सूचना और मरीज के निर्णय के अधिकार से जुड़ा गंभीर विषय बन सकती है।

डॉ. राकेश रंजन का कहना है कि उनका मां दुर्गा हॉस्पिटल से कोई संबंध नहीं है। उनका आरोप है कि उनकी पहचान का इस्तेमाल कर मरीजों के बीच गलत संदेश पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई है कि यदि उक्त अस्पताल में किसी मरीज के साथ चिकित्सकीय लापरवाही अथवा कोई अप्रिय घटना होती है, तो उसका प्रतिकूल प्रभाव उनकी वर्षों से अर्जित सामाजिक एवं पेशेवर प्रतिष्ठा पर पड़ सकता है।

 

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज जानकारी बनी जांच का आधार

शिकायत के साथ कथित तौर पर विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के स्क्रीनशॉट, आधार कार्ड तथा चिकित्सकीय पंजीयन संबंधी दस्तावेज भी पुलिस को उपलब्ध कराए गए हैं। इससे मामला केवल मौखिक आरोपों तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि पुलिस के सामने डिजिटल रिकॉर्ड की जांच का विषय भी बन गया है। वहीं, मां दुर्गा हॉस्पिटल के डायरेक्टर प्रदीप मलिक ने कहा है कि उन्हें सोशल मीडिया पर डॉक्टर का नाम जोड़े जाने की जानकारी नहीं है और अस्पताल प्रबंधन द्वारा किसी के नाम का अनुचित लाभ नहीं उठाया जा रहा है।

 

एसपी कार्यालय पहुंची शिकायत, जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन

चिकित्सक दंपति द्वारा 24 अगस्त 2026 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत प्रस्तुत की गई है। शिकायत की प्रतिलिपि स्वास्थ्य मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, मध्यप्रदेश शासन के स्वास्थ्य विभाग तथा पुलिस महानिदेशक कार्यालय को भी भेजे जाने की जानकारी दी गई है। अब पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित ऑनलाइन प्रोफाइल किसने बनाई, उसमें डॉक्टर का नाम, फोटो और मोबाइल नंबर किस आधार पर दर्ज किया गया, मरीजों को किस प्रकार की जानकारी दी गई और इस पूरी प्रक्रिया से किसी व्यक्ति को आर्थिक अथवा अन्य लाभ तो नहीं मिला।

यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी डॉक्टर की डिजिटल पहचान का कथित दुरुपयोग केवल नाम और प्रतिष्ठा का विषय नहीं है। यदि कोई मरीज किसी खास चिकित्सक पर भरोसा करके उपचार के लिए पहुंचता है, तो उसे वास्तविक चिकित्सक, उसकी योग्यता और उपलब्धता के संबंध में सही जानकारी मिलना बेहद आवश्यक है। ऐसे में पुलिस जांच का निष्पक्ष और तथ्यपरक होना मरीजों के हित में भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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