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जिंदगी बचाने के लिए डॉक्टरों ने दिमाग की हड्डी पेट में रखी, अब नचा रहे डॉक्‍टर

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भोपाल। विदिशा जिले के नटेरन की रहने वाली गीताबाईं सेन (45) 11 महीने से अपने दिमाग की हड्डी पेट में रखकर घूम रही है। पहले तो डॉक्टरों ने उसकी जिंदगी बचाने के लिए दिमाग की हड्डी काट कर पेट की चमड़ी के नीचे रख दी। अब फिर उसकी जिंदगी बचाने के लिए इस हड्डी को दोबारा दिमाग में उसी जगह पर लगाया जाना है। हड्डी लगाने के लिए स्क्रू और प्लेट (इंप्लांट) की जरूरत है, लेकिन गरीबों के लिए शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना के तहत कुछ इंप्लांट की सप्लाई हमीदिया में नहीं हो रही है। इस वजह से महिला की सर्जरी अटकी हुई है।

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दो दिन पहले महिला की सर्जरी के लिए जीएमसी की डीन डॉ. अरुणा कुमाार को फोन किया। इसके बाद भी उसकी सर्जरी नहीं हो पाई है।

गीताबाई पिछले साल अगस्त में बाइक से गिर गई थी। इस दौरान उसके सिर में गहरी चोट लगी थी। परिजन ने उसे नटेरन और विदिशा के जिला अस्पताल में दिखाया। यहां से उसे हमीदिया अस्पताल रेफर कर दिया गया। यहां उसे न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने देखा। महिला के सिर में खून जमा होने से काफी सूजन थी। इससे उसकी मौत भी हो सकती थी। कोई दिक्कत न हो, इसलिए डॉक्टरों ने दिमाग की हड्डी काटकर महिला के पेट की चमड़ी के नीचे रख दी।

परिजन का कहना है कि इस ऑपरेशन के बाद महिला ने बोलना बंद कर दिया। उसका एक तरफ का अंग सुन्न पड़ गया। अब उसे भोजन में भी दिक्कत आ रही है। वह मुश्किल से एक-दो रोटी ही खा पाती है। दर्द से वह दिन-रात चिल्लाती रहती है। महिला के पति, बेटा और बेटी उसे लेकर पिछले 11 महीने से हमीदिया के चक्कर लगा रहे हैं।

महीने भर भर्ती रहने के बाद भी नहीं हुई सर्जरी

महिला को करीब तीन महीने पहले भी हमीदिया अस्पताल में डॉक्क्टरों ने सर्जरी के लिए भर्ती किया था। वह करीब एक महीने भर्ती रही। इसके बाद भी इंप्लांट नहीं होने की वजह से उसकी सर्जरी नहीं हो सकी। परिजन छुट्टी करा घर ले गए थे। महिला के पति दौलतराम सेन मंगलवार को फिर हमीदिया अस्पताल पंहुचे तो डॉक्टरों ने फिर कहा कि सामान नहीं है इसलिए अभी ऑपरेशन नहीं हो पायेगा।

इसके बाद दौलतराम पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पास मदद के लिए गए। शिवराज ने जीएमसी की डीन डा. अरूणा कुमार को फोन किया। साथ ही हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ. एके श्रीवास्तव को पत्र भी लिखा। दौलतराम इमरजेंसी में सीएमओ डयूटी कक्ष में पहुंंचे। यहां मौजूद डॉक्टर ने उन्हें अगले दिन आने के लिए कहा।

आयुष्मान योजना के मरीज के लिए नहीं आ रहा सामान

न्यूरोसर्जरी विभाग में मरीजों की सर्जरी के लिए खास तरह के इंप्लांट लगते हैं। डॉक्टरों की तरफ से मांग पत्र भेजा जाता है, लेकिन समय पर जरूरी सामान उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इस वजह से दूसरे मरीजों के इलाज में भी दिक्कत आ रही है। डॉक्टरों के मुताबिक महिला के इलाज में करीब 25 हजार रुपए के करीब 15 प्रकार के सामान लगने हैं।

महिला को बुलाया है

महिला को आज बुलाया गया था, पर वह आई नहीं है। हर बीमारी में अलग-अलग तरह का सामान लगता है। मांग पत्र मिलने पर मंगा लिया जाता है। सामान की उपलब्धता में कोई दिक्कत नहीं है।

-डॉ. एके श्रीवास्तव, अधीक्षक, हमीदिया अस्पताल

महिला की जान बचाने के लिए हड्डी निकालना जरूरी था

महिला के सिर में सूजन थी। इससे उसकी मौत भी हो सकती थी। लिहाजा हड्डी काटकर पेट की चमड़ी के नीचे रखी थी। इससे खाने-पीने में कोई दिक्कत नहीं होती। महिला को सुन्नपन व दूसरी तकलीफ सिर में चोट की वजह से है न कि हड्डी निकालने के चलते। हड्डी निकालने से सिर मुलायम हो गया है, जिससे कोई चीज चुभने का डर है।

-डॉ. एके चौरसिया, न्यूरो सर्जन, हमीदिया

 

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