Wednesday, May 27, 2026
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Post-COVID Side Effects: कोरोना के बाद युवाओं में तेजी से बढ़ रही कूल्हे की ये गंभीर बीमारी; हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी में 40% का उछाल

Post-COVID Side Effects: कोरोना के बाद युवाओं में तेजी से बढ़ रही कूल्हे की ये गंभीर बीमारी; हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी में 40% का उछाल

नई दिल्ली: कोविड-19 वैश्विक महामारी के बाद भारत में युवाओं के स्वास्थ्य को लेकर एक नया और चौंकाने वाला खतरा सामने आया है। देश में 30 से 40 साल की उम्र के युवाओं और मध्यम आयु वर्ग के लोगों में हिप अर्थराइटिस (कूल्हे का गठिया) और एवास्कुलर नेक्रोसिस (AVN) के मामले बेहद तेजी से बढ़ रहे हैं।

पहले जिस बीमारी को केवल बुजुर्गों या किसी गंभीर हादसे (आघात) के शिकार मरीजों तक सीमित माना जाता था, वह अब युवाओं को अपना शिकार बना रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, देश भर में टोटल हिप रिप्लेसमेंट (THR) यानी कूल्हा बदलने की सर्जरी में लगभग 40 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

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 क्या है एवास्कुलर नेक्रोसिस (AVN)? क्यों गल रही है हड्डी?

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, एवास्कुलर नेक्रोसिस (Avascular Necrosis) एक बेहद दर्दनाक और गंभीर स्थिति है:

  • ब्लड सर्कुलेशन रुकना: इस बीमारी में कूल्हे की हड्डी के मुख्य हिस्से (फीमर हेड) में खून का दौरा या ब्लड सर्कुलेशन बाधित हो जाता है।
  • टिशू लॉस (उत्तकों का क्षय): खून न मिलने के कारण हड्डी के जीवित उत्तक (Tissues) धीरे-धीरे मरने लगते हैं और हड्डी अंदर से गलने या सड़ने लगती है।
  • चलना-फिरना बंद: शुरुआती दौर में ध्यान न देने पर कूल्हे का जोड़ पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो जाता है, जिससे मरीज का उठना-बैठना और चलना भी दूभर हो जाता है।

 ‘दिल्ली हिप 360 सम्मेलन’ में डॉक्टरों की चेतावनी: जिम्मेदार है ‘स्टेरॉयड’

नई दिल्ली के क्राउन प्लाजा होटल में आयोजित ‘दूसरे दिल्ली हिप 360 सम्मेलन’ में देश भर के दिग्गज ऑर्थोपेडिक डॉक्टरों ने इस खतरे पर विस्तार से चर्चा की। दिल्ली ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन और इंडियन आर्थ्रोप्लास्टी एसोसिएशन द्वारा आयोजित इस बैठक में कई बड़े खुलासे हुए।

दिल्ली के मैक्स अस्पताल में ऑर्थोपेडिक्स एवं जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के डायरेक्टर और सम्मेलन के आयोजन अध्यक्ष डॉ. एल तोमर ने बताया कि इस समस्या के पीछे सबसे बड़ी वजह कोविड के दौरान इस्तेमाल की गई दवाइयां हैं:

“कोविड महामारी के दौरान मरीजों की जान बचाने के लिए स्टेरॉयड (Steroids) ने जीवन रक्षक की भूमिका निभाई थी। लेकिन कुछ रोगियों में जरूरत से ज्यादा, बिना डॉक्टरी सलाह के या लंबे समय तक स्टेरॉयड के उपयोग से हड्डियों को भारी नुकसान पहुँचा है। इसी वजह से कम उम्र के मरीज भी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त फीमर हेड और गठिया की शिकायत लेकर अस्पताल पहुँच रहे हैं।”

 जल्द पहचान ही है एकमात्र उपाय (Early Diagnosis)

इंटरनेशनल मेडिकल जर्नल्स में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक, स्टेरॉयड के साइड-इफेक्ट से होने वाला एवास्कुलर नेक्रोसिस (AVN) दवा लेने के कुछ महीनों के भीतर ही विकसित हो सकता है।

  • जोड़ों को बचाया जा सकता है: डॉ. तोमर ने बताया कि अगर शुरुआती स्टेज (दर्द शुरू होने के तुरंत बाद) में ही एमआरआई (MRI) या अन्य जांचों के जरिए बीमारी का पता चल जाए, तो कोर डीकंप्रेशन जैसी ‘जॉइंट प्रिजर्वेशन’ तकनीकों से असली कूल्हे को बिना बदले भी ठीक किया जा सकता है।
  • देरी होने पर सिर्फ सर्जरी रास्ता: यदि मरीज दर्द को नजरअंदाज करता है और बीमारी एडवांस स्टेज में पहुँच जाती है, तो हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी (THR) ही एकमात्र रास्ता बचता है।

Usha Pamnani

20 वर्षों से डिजिटल एवं प्रिंट मीडिया की पत्रकारिता में देश-विदेश, फ़िल्म, खेल सहित सामाजिक खबरों की एक्सपर्ट, वर्तमान में यशभारत डॉट कॉम में वरिष्ठ जिला प्रतिनिधि