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जनरल डायर को उसके किए की सजा देने के लिए उधम सिंह ने किया था 21 वर्ष इंतजार

30 07 2020 udham singh general dyre 20574769

नई दिल्‍ली ।शहीद उधम सिंह उस निडर और जांबाज भारतीय का नाम है जिसने जलियांवाला नरसंहार के हत्‍यारे और दोषी को मारकर इस जघन्‍य हत्‍याकांड का बदला लिया था।

वो 26 दिसंबर का दिन था जब उन्‍होंने लंदन में जनरल डायर को गोली मारकर अपनी वर्षों पुरानी प्रतिज्ञा पूरी की थी।

उधम सिंह को डायर की हत्‍या के आरोप में 31 जुलाई 1940 को फांसी दे दी गई थी। जिस वक्‍त कोर्ट में उन्‍हें दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा देने का आदेश दिया था उस वक्‍त भी उनके चेहरे पर डर की कोई परछाई तक नहीं थी।

इसके उलट वह अपनी प्रतिज्ञा को पूरा करने की वजह से बेहद खुश दिखाई दे रहे थे।

जलियांवाला बाग नरसंहार

13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के दिन अमृतसर के जलियांवाला बाग में एक सभा रखी गई थी।

शहर में कर्फ्यू लगे होने के बाद भी इसमें सैकड़ों की तादाद में लोग शामिल थे। इसमें कुछ नेता भाषण देने वाले थे।

बैसाखी के त्‍यौहार की वजह से भी लोग मेला और शहर घूमने बाहर से भी आए हुए थे। वहीं दूसरी तरफ जलियांवाला बाग में लगातार लोगों की भीड़ बढ़ती ही जा रही थी।

इसी दौरान ब्रिगेडियर जनरल माइकल ओ डायर 90 ब्रिटिश सैनिकों को लेकर वहां पहुंच गया। उन सभी के हाथों में भरी हुई राइफल थीं। भाषण दे रहे नेताओं ने उन्‍हें देखा लेकिन वहां मौजूद लोगों से शांत बैठे रहने को कहा।

कुछ देर के बाद डायर ने सैनिकों वहां पर मौजूद निहत्‍थे लोगों पर गोलियां चलाने का आदेश दे दिया। 10 मिनट में कुल 1650 राउंड गोलियां चलाई गईं।

जलियांवाला बाग चारों तरफ से घिरा हुआ था भागने या जान बचाने का कोई रास्‍ता नहीं था। कुछ लोग जान बचाने के लिए मैदान में मौजूद कुएं में कूद गए।

देखते ही देखते वह कुआं भी लाशों से पट गया। उधम सिंह के जीवन पर इस नरसंहार का गहरा घाव था। उन्‍होंने इस मंजर को करीब से देखा था। तभी से उनके दिल में डायर से बदला लेने की आग धधक रही थी।

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