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गोवर्धन पूजन: गायों का पूजन कर भगवान श्रीकृष्‍ण को अर्पण होगा छप्‍पन भोग

पनागर /दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजन किया जाता है। इस दिन गायों का पूजन करने का विशेष महत्‍व है साथ ही भगवान श्रीकृष्‍ण को छप्‍पन भोग लगाया जाता है। इसे अन्‍नकूट महोत्‍सव के नाम से भी जाना जाता है।

शहर में भी गोसेवकों द्वारा पूजन किया जाएगा। प्रताप वार्ड पनागर के यादव समाज द्वारा और ग्रामीण के यादव जाति के लोग एकत्रित होकर गांधी वार्ड के अभिमन्यु चौक पनागर पर विशेष आयोजन किया जाता है जिसमें बडी संख्‍या में ग्रामीण शामिल होते हैं।

गायों को करते हैं तैयार

पूजन के दौरान गायों को विशेष रूप से तैयार किया जाता है। ग्‍वाल विशेष रूप से पारंपरिक वेशभूषा में तैयार होकर नृत्‍य करते हैं। इसे अहीर नृत्‍य के नाम से जाना जाता है। यादव समाज द्वारा गायों का विशेष पूजन किया जाता है। और भगवान श्रीकृष्‍ण को छप्‍पन भोग का अर्पण किया जाएगा।

गोवर्धन पूजन में ये करें

गोवर्धन पूजन भगवान श्रीकृष्ण के अवतार के बाद द्वापर युग से प्रारंभ हुई। इस दिन गाय-बैल आदि पशुओं को स्नान कराके धूप-चंदन तथा फूल माला पहनाकर उनका पूजन किया जाता है।

  • इस दिन गौमाता को मिठाई खिलाकर उसकी आरती उतारते हैं तथा प्रदक्षिणा भी की जाती है।
  • इस दिन गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाकर उसके समीप विराजमान कृष्ण के सम्मुख गाय तथा ग्वाल-बालों की रोली, चावल, फूल, जल, मौली, दही तथा तेल का दीपक जलाकर पूजा और परिक्रमा की जाती है।
  • जब कृष्ण ने ब्रजवासियों को मूसलधार वर्षा से बचाने के लिए 7 दिन तक गोवर्धन पर्वत को अपनी सबसे छोटी उंगली पर उठाकर इन्द्र का मान-मर्दन किया तथा उनके सुदर्शन चक्र के प्रभाव से ब्रजवासियों पर जल की एक बूंद भी नहीं पड़ी, सभी गोप-गोपिकाएं उसकी छाया में सुखपूर्वक रहे, तब ब्रह्माजी ने इन्द्र को बताया कि पृथ्वी पर श्रीकृष्ण ने जन्म ले लिया है, उनसे बैर लेना उचित नहीं है। तब श्रीकृष्ण अवतार की बात जानकर इन्द्रदेव अपने इस कार्य पर बहुत लज्जित हुए और भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा-याचना की।

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