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कोरोना की रफ्तार पर ब्रेक, कहीं तूफान के पहले की शांति तो नहीं?

आशीष शुक्ला..

coronavirus पूरे देश मे कोरोना संक्रमण की रफ्तार पर अचानक ब्रेक लग गया है। अस्पतालों में बैड खाली हो रहे। लोग होम आइसोलेशन में ठीक हो रहे। कोरोना का डर समाप्त हो गया। देश मे पिछले एक सप्ताह के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह आश्चर्य जनक रूप से कम हो रहे। इधर जानकर बार बार कह रहे कि अभी कोरोना का दूसरा दौर आना बाकी है ऐसे में सवाल उठता है कि कहीं यह तूफान से पहले की शांति तो नहीं?

अब तक कोरोना की वेक्सीन नहीं आई ऐसे में कोरोना के प्रति लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है इसे लेकर जानकर लोगों में चिंता है ? बावजूद लोग बेफिक्र नजर आ रहे हैं।

जबलपुर मेडिकल कालेज कोविड वार्ड का नजारा अचानक बदल गया कल तक एक एक बैड के लिए मारामारी मची थी आज यहां आईसीयू तक के बेड खाली पड़े हैं। निजी अस्पतालों से भी कोरोना मरीज गायब है। एक दिन में जबलपुर में 200 मरीज पहुंच रहे थे जो घट कर 50 से भी नीचे जा चुके हैं।

खबर भले ही राहत वाली लगे पर यह आने वाले समय की भयावह स्थिति की ओर इशारा तो नहीं। डॉक्टर कहते हैं कि ये तो तय है देश प्रदेश और जबलपुर में लोगों ने जागरूकता अपनाई। मास्क सेनेटाइजेशन तथा स्वयं को बचाने के लिए समन्वित प्रयास का नतीजा है जब कोरोना की चेन टूटी है। मगर यह चेन कभी भी लंबी हो सकती है जरूरत यही है कि कोरोना को तब तक हल्के में न लिया जाए जबतक इसकी प्रभावी वेक्सीन नहीं आ जाती।

भारत में कोरोना मामलों में लगातार गिरावट जारी है. वहीं, इस वायरस के कारण 24 घंटे में होने वाली मौतों के औसत को देखें तो भारत लॉकडाउन से पहले की स्थिति में पहुंच गया है और यह देश के लिए बड़ी राहत की खबर है. पिछले 24 घंटे में भारत में कोरोना से 500 से कम लोगों की मौत हुई है. वहीं, कोरोना मरीजों का मृत्यू दर 1.5 फीसदी पर पहुंच गया है जो कि 22 मार्च के बाद से अभी तक की सबसे बड़ी गिरावट है. यहां तक कि वर्तमान में भारत के 14 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में कोरोना मरीजों की मृत्यु दर का 1 फीसदी से भी कम है।

आंकड़ों पर न जाकर हम सभी को इस महामारी को लेकर अभी भी वैसी ही चिंता की जरीरत है जैसी लॉक डाउन के वक्त की गई थी। मास्क ही फिलहाल वेक्सीन है। हाथों को साफ रखना ही फ़िलहाल कोरोना की दवा है। अमेरिका में एक दिन में 87 हजार लोग पॉजिटिव निकले तो फ्रांस में फिर से स्थिति खराब हो रही यही स्थिति ब्रिटेन की भी है लिहाजा हम सभी को अब और भी ज्यादा सतर्क रहने की आवश्यकता है। आने वाले ठंड के मौसम में खास तौर पर।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम