एमपी हाई कोर्ट का अहम फैसला: अंतर-जिला ट्रांसफर से शिक्षक की वरिष्ठता प्रभावित होने की आपत्ति पर फिर निर्णय ले सरकार
इंदौर (विशेष संवाददाता): मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने जिला स्तरीय संवर्ग के प्राथमिक शिक्षक के स्थानांतरण से जुड़े मामले में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी शिक्षक का तबादला दूसरे जिले में किया जाता है, तो उससे उनकी वरिष्ठता प्रभावित होने संबंधी आपत्ति पर सरकार को गंभीरता से विचार करना होगा। High Court ने शासन को निर्देश दिए हैं कि वह चार सप्ताह के भीतर स्थानांतरण आदेश पर नए सिरे से निर्णय ले। तब तक शिक्षक अपनी वर्तमान पदस्थापना पर ही कार्यरत रहेंगे।
मामला क्या है?
यह याचिका प्राथमिक शिक्षक पद्म कुमार पुष्पम द्वारा दायर की गई थी। याचिकाकर्ता के अनुसार, 16 जून 2026 को उनका स्थानांतरण खंडवा जिले के शासकीय प्राथमिक विद्यालय में कर दिया गया था। इसके खिलाफ उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 24 जून को कोर्ट ने शासन को शिक्षक के अभ्यावेदन पर विचार करने का निर्देश दिया था। एमपी हाई कोर्ट का अहम फैसला: अंतर-जिला ट्रांसफर से शिक्षक की वरिष्ठता प्रभावित होने की आपत्ति पर फिर निर्णय ले सरकार
वरिष्ठता प्रभावित होने का तर्क:
शिक्षक ने अपने अभ्यावेदन में मप्र जनजातीय एवं अनुसूचित जाति शिक्षण संवर्ग (सेवा एवं भर्ती) नियम का हवाला देते हुए कहा:
उनका संवर्ग जिला स्तरीय है।
दूसरे जिले में पदस्थापना होने से उनकी वरिष्ठता प्रभावित होगी और नए जिले की वरिष्ठता सूची में उन्हें सबसे निचले क्रम पर रखा जा सकता है।
हाई कोर्ट की टिप्पणी:
माननीय हाई कोर्ट ने पाया कि शिक्षक के अभ्यावेदन को निरस्त करते समय संबंधित अधिकारी ने वरिष्ठता से जुड़ी मूल आपत्ति पर विचार ही नहीं किया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि “स्थानांतरण आदेश में नए जिले में कार्यभार ग्रहण करने की दिनांक से वरिष्ठता मानने का प्रावधान प्रथम दृष्टया अनुचित प्रतीत होता है।” कोर्ट ने शासन को वरिष्ठता के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए चार सप्ताह के भीतर नया आदेश पारित करने का निर्देश दिया है।










