इलाज के लिए तरस रहे कोरोना पॉजीटिव मरीज नाकाफी साबित हो रहे स्वास्थ्य विभाग के इंतजाम
कटनी। जिले में लगातार बढ़ते कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग के इंतजाम अब नाकाफी साबित हो रहे हैं। हर दिन औसतन करीब एक सैकड़ा से अधिक लोगों की रिपोर्ट पॉजीटिव आ रही है, इसके बावजूद न तो राज्य सरकार और न ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार की उचित व्यवस्था की जा रही है। एक अपै्रल से 10 अप्रैल तक करीब एक हजार लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है लेकिन इसमे से 10 प्रतिशत को ही अस्पताल में भर्ती करते हुए उपचार किया जा रहा है।
करीब 80 प्रतिशत से अधिक कोरोना संक्रमित मरीज होम आईसोलेशन पर हैं। जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिला चिकित्सालय में कोविड वार्ड, संदिग्ध वार्ड और आईसीयू वार्ड मरीजों से फुल हो चुके हैं।
वैकल्पिक व्यवस्था बनाने के बाद भी मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल रहा है। इन सब स्थितियों के बावजूद प्रशासनिक अधिकारी केवल जिला चिकित्सालय का निरीक्षण और आवश्यक निर्देश देने में ही मशगूल हैं। जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की हालत बद से बदत्तर हो चुकी है। निजी अस्पतालों में भी मरीजों से मनमानी वसूली की जा रही है।
तीन दिन में मिल रही सेम्पलों की रिपोर्ट
जिले में एक तरफ कोरोना संक्रमण के चलते स्थिति विस्फोटक होती जा रही है तो वहीं दूसरी तरफ राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग इसको कितनी गंभीरता से ले रहा है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कोरोना संक्रमण के संदेह पर जिन मरीजों का सेम्पल लेकर जांच के लिए मेडिकल कॉलेज जबलपुर भेजा जाता है, उसकी रिपोर्ट आने में तीन दिन का समय लग रहा है। तीन दिनों तक मरीज रिपोर्ट आने का इंतजार करते रहते हैं, तब तक न तो जिला चिकित्सालय और न ही निजी अस्पतालों में उनका उपचार हो पाता है। तीन दिन बाद रिपोर्ट आने के बाद सबसे बड़ी समस्या रिपोर्ट पता लगाने की रहती है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा पहले इसकी जानकारी मैसेज के माध्यम से दी जाती थी लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा। सेम्पल देने के बाद संक्रमित होने वाले मरीज रिपोर्ट पता लगाने के लिए परेशान होते रहते हैं। विदित हो कि जिला चिकित्सालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित स्वास्थ्य केन्द्रों में आरटीपीसीआर के माध्यम से सस्पेक्टेड मरीजों के सेम्पल एकत्रित करते हुए जांच के लिए मेडिकल कॉलेज जबलपुर भेजे जाते हैं।
10 दिनों में एक हजार के करीब पहुंचा संक्रमितों का आंकड़ा
कोरोना संक्रमण से जिले में स्थिति भयावह होती जा रही है, खासकर अपै्रल में महीने में हर दिन विस्फोट हो रहा है। पिछले पांच दिनों से हर दिन औसतन करीब एक सैकड़ा से अधिक कोरोना संक्रमित मरीज मिल रहे हैं। लॉकडाउन के पहले दिन भी संक्रमण की रफ्तार नहीं रूकी। सीएमएचओ कार्यालय द्वारा हर दिन जारी किए जाने वाले हेल्थ बुलेटिन के मुताबिक जिले में एक अपै्रल से आज 11 अपै्रल तक मिले संक्रमित मरीजों की संख्या करीब एक हजार तक पहुंच गई है। पहले जहां चौबीस घंटे में आधा सैकड़ा मरीज सामने आ रहे थे तो अब यह संख्या में दो सैकड़ा के आसपास पहुंच गई है। कल 10 अपैल को रेपिड एंटीजन टेस्ट की रिपोर्ट में 41 नए पॉजीटिव मामले सामने आए हैं। इस तरह अपै्रल में अब तक 954 संक्रमित मरीज मिल चुके हैं और जिले में कुल संक्रमित मरीजों की संख्या 3488 पहुंच गई है।
800 से ज्यादा मरीज होम आईसोलेशन, नहीं हो रही मॉनीटरिंग
जानकारी के मुताबिक करीब 800 से ज्यादा मरीज ऐसे हैं, जिन्हें बिस्तरों की कमी के चलते होम आईसोलेशन पर रखा गया है। सीएमएचओ कार्यालय के बुलेटिन के अनुसार जिला अस्पताल के कोविड केयर सेंटर सहित प्राइवेट अस्पतालों में 77 मरीज भर्ती हैं। 879 मरीज होम आइसोलेशन पर है। वहीं सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शहर के चार प्राइवेट अस्पतालों में लगभग दो सौ एवं शहर के बाहर जबलपुर व भोपाल में 100 मरीज भर्ती हैं, इनके अलावा सीटी स्केन की जांच में संक्रमित निकले मरीजों का तो कोई रिकार्ड ही स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। कोरोना पॉजिटिव आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जिन मरीजों को होम आइसोलेशन पर रखा है, उनकी मॉनीटरिंग भी नहीं की जा रही है। गांवों में कोटवार, सचिव, जीआरएस, आंगनबाड़ी, आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से सूचना देकर दवाएं दे दी जाती हैं। इसके बाद किसी से उनका हाल जानने की कोशिश भी नहीं होती है।

