
नई दिल्ली: यशभारत डिजिटल डेस्क: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनने और पार्टी के भीतर मचे जबरदस्त आंतरिक विद्रोह के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अस्तित्व पर अब तक का सबसे बड़ा संकट मंडरा रहा है। दिल्ली के सियासी गलियारों से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज खबर सामने आ रही है कि तृणमूल कांग्रेस का अब कांग्रेस (INC) में पूर्ण विलय (Merger) हो सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, इस महा-विलय की पटकथा खुद कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने लिखी है और उन्होंने टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के सामने यह बड़ा प्रस्ताव रखा है। इस बीच, सियासी हलचल तब और तेज हो गई जब बुधवार सुबह टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की।
टीएमसी के संकट की बड़ी बातें
- पार्टी पर संकट: बंगाल में सत्ता हाथ से जाने के बाद से टीएमसी के कई विधायक और सांसद लगातार पार्टी छोड़ रहे हैं या बगावत पर आमादा हैं।
- सोनिया गांधी का ‘मास्टरस्ट्रोक’: इंडिया गठबंधन (INDIA Bloc) की बैठक के दौरान सोनिया गांधी और ममता बनर्जी के बीच हुई मुलाकात में विलय का यह ऐतिहासिक प्रस्ताव दिया गया।
- बड़ी मुलाकात: संकट के बीच बुधवार सुबह अभिषेक बनर्जी और डेरेक ओ ब्रायन की राहुल गांधी से मुलाकात ने विलय की अटकलों पर मुहर लगा दी है।
- अस्तित्व बचाने की जंग: लगातार होते इस्तीफों के बीच ममता बनर्जी किसी भी तरह अपनी पार्टी को टूटने से बचाने की आखिरी कोशिशों में जुटी हुई हैं।
‘इंडिया गठबंधन’ की बैठक में तैयार हुई विलय की जमीन
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही टीएमसी का पूरा संगठनात्मक ढांचा बिखरने की कगार पर पहुंच गया है। एक के बाद एक दिग्गज नेता ममता बनर्जी का साथ छोड़ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रासंगिकता बचाए रखने और पार्टी के बचे हुए नेताओं को एकजुट रखने के लिए ममता बनर्जी अपने ‘पुराने मूल’ (कांग्रेस) की तरफ लौटने पर गंभीरता से विचार कर रही हैं। बता दें कि साल 1998 में ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर ही टीएमसी का गठन किया था।
बगावत के दौर के बीच आखिरी रास्ता!
TMC के भीतर असंतोष इस कदर बढ़ चुका है कि पार्टी के कई सांसदों और विधायकों का झुकाव विरोधी खेमे की तरफ देखा जा रहा है। ऐसे में अगर टीएमसी का आधिकारिक तौर पर कांग्रेस में विलय हो जाता है, तो ममता बनर्जी अपने बचे हुए कुनबे को एक मजबूत राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म देकर इस राजनीतिक घेराबंदी से खुद को सुरक्षित कर पाएंगी।
यशभारत विश्लेषण: यदि यह विलय हकीकत में बदलता है, तो यह देश की राजनीति का सबसे बड़ा उलटफेर होगा। इससे न केवल पश्चिम बंगाल में विपक्षी राजनीति को एक नया मोड़ मिलेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस को भी एक बड़ी ताकत हासिल हो सकती है। फिलहाल, दोनों ही पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व ने इस पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगाई है, लेकिन दिल्ली में बंद कमरों में बैठकों का दौर लगातार जारी है।








