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आदिवासी वोट बैंक को साधने में जुटी कांग्रेस

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नेशनल डेस्‍क।बीस प्रतिशत आदिवासी वोट बैंक को अपने पक्ष करने के लिए कांग्रेस किसी भी तरह की कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहती. राज्य की 47 सीटों पर आदिवासी वोट हार-जीत तय करते हैं. इसलिए 24 फरवरी को जबलपुर में होने वाले आदिवासी महासम्मेलन सफल बनाने के लिए कांग्रेस पदाधिकारी जी जान से जुटे हैं.

मध्यप्रदेश में सत्ता का वनवास काट रही कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनावों में जाने से पहले सभी को वर्गों को छूने की कोशिश कर रही है. इसी क्रम में कांग्रेस अपने छिटके आदिवासी वोटों को वापस अपनी ओर लाने का भी प्रयास कर रही है. इसके लिए कांग्रेस की ओर से आगामी  24 फरवरी को जबलपुर में एक बड़े आदिवासी सम्मेलन का आयोजन करने जा रही है. सम्मेलन को सफल बनाने के लिए पार्टी पदाधिकारी  ऐढी से चोटी तक का जोर लगाए हुए हैं. इस सभा में आने के लिए प्रदेशभर के आदिवासी समाज के लोगों को बुलावा भेजा गया है.

प्रदेश में आदिवासी एक बड़ा वोटबैंक ही नहीं बल्कि विचारधारा के प्रचार-प्रसार का एक बड़ा ज़रिया भी है. आदिवासियों को साधने की कोशिश दोनों ही पार्टियों ने हमेशा से करती आई हैं.  इसमें  दोराय नहीं है कि आदिवासियों का एक बहुत बड़ा वर्ग आज भी कांग्रेस का पारंपरिक वोटर है. लेकिन सत्ता से कांग्रेस की 14 साल की दूरी ने आदिवासियों को भी पार्टी से दूर जरूर कर दिया है.
वोट बैंक की बात की जाए तो राज्य में आदिवासियों का  20% आबादी आदिवासी वोटरों की है. विधानसभा की 47  सीटें ऐसी हैं जहां इनका वोट निर्णायक साबित होता है और ये प्रत्याशी की हार या जीत तय करते हैं.
सम्मेलन को लेकर जब कांग्रेस नेता भूपेंद्र गुप्ता ने भाजपा के राज में आदिवासियों का शोषण हुआ है. कांग्रेस हर तरह से लोगों को सरकार की गलतियों के बारे में बताना चाहती है. ये सम्मेलन भी उसी सिलसिले में किया जा रहा है.

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