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…अब सरकारी अस्पताल फोन से पूछेगा मरीजों का हाल

जबलपुर,यभाप्र। सरकारी विभागों में दलालों का मकड़ जाल आम आदमी को जकड़ हुए है। कोई भी काम ये दलाल मोटी रकम लेकर झट से करवा देते हैं पर अब स्वास्थ्य विभाग ने दलालों व बिचौलियों से छुटकारा दिलाने के लिए राज्य बीमारी सहायता योजना में अहम बदलाव कर रहा है। जिससे अब अब इस योजना के गंभीर बीमारी के रोगियों को सीएमएचओ और सीएस कार्यालय के चक्कर नहीं काटना पड़ेंगे। इलाज भी तय समय पर हो जाएगा। बकायदा रोगी को ऑपरेशन व इलाज के लिए अस्पताल से मोबाइल पर मैसेज तो आएंगे ही फोन कर भी बुलाया जाएगा। यह बदलाव योजना को ऑनलाइन किए जाने से होगा।

इसके लिए साफ्टवेयर तैयार करवाया है।

अगले महीने से व्यवस्था को लागू कर दिया जाएगा। इसका फायदा प्रदेश के हर महीने करीब 3 हजार रोगियों को मिलेगा। सूत्रों के अनुसार आगामी 27 नवंबर को ये योजना लांच की जा सकती
गरीब तपके के गंभीर बीमारी से पीडितों के लिए शासन ने 1997 से यह योजना शुरू की थी। इसके तहत 21 चिह्नित गंभीर बीमारियों का 25 हजार से 2 लाख रुपए तक के इलाज/ऑपरेशन का खर्च शासन वहन करता है। दो दशक से रोगी मैन्यूअली आवेदन करके योजना का लाभ लेते आ रहे हैं लेकिन शासन ने कुछेक प्रकरणों में पाया कि रोगियों को इलाज के लिए अनावश्यक रूप से चिकित्सा अफसरों के दफ्तरों के चक्कर काटना पड़ते हैं, इससे समय पर इलाज नहीं मिल पाता है। लिहाजा शासन ने योजना को पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन साफ्टवेयर तैयार करवाया है। स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय संचालक डॉ. केएल साहू के अनुसार साफ्टवेयर को लांच करने से पूर्व से 21 नवंबर को 25 व 22 नवंबर को 26 जिलों के सीएमएचओ, सीएस, नोडल अधिकारी व ऑपरेटरों को भोपाल में ट्रेनिंग दी जाएगी। उनकी क्यूरी दूर कर सुझाव भी लिए जाएंगे। इसके बाद दिसंबर से साफ्टवेयर को लांच कर दिया जाएगा। कोई दिक्कत आई तो 1 जनवरी को शुरुआत करेंगे।
हर महीने औसतन 40 से50 रोगियों को लाभ
सीएमएचओ डॉ.मुरली अग्रवाल ने बताया कि राज्य बीमारी सहायता (निधि) योजना के तहत जिले से हर महीने औसतन 40 से50 रोगियों का ऑपरेशन/इलाज होता है। सीएस डॉ. एके सिन्हा ने बताया कि गंभीर बीमारियों के 15 प्रकरण तो वे ही जिला अस्पताल से स्वीकृत करते हैं। व्यवस्था ऑनलाइन होने से रोगी के साथ अमले को भी सुविधा होगी।
एक नजर
दलालों से छुटकारा मिल सकेगा
रोगी के आवेदन करने से ही ऑपरेशन की तिथि की गिनती शुरू हो जाएगी।
हर स्टेज से आवेदन गुजरने की समय सीमा तय होगी।
जहां प्रक्रिया रुकेगी, जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई के दायरे में लिया जाएगा।
दलालों व बिचौलियों की हिस्सेदारी खत्म होगी।
इलाज कब, किस अस्पताल में होगा, मैसेज मोबाइल पर रोगी को पहुंचेगा।
रोगी को संबंधित अस्पताल से मोबाइल कर भी बुलाया जाएगा।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम

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