ईरान–अमेरिका-इजराइल जंग पर दुनिया की नजर: क्या नरेंद्र मोदी बन सकते हैं शांति के सूत्रधार?

ईरान–अमेरिका-इजराइल जंग पर दुनिया की नजर: क्या नरेंद्र मोदी बन सकते हैं शांति के सूत्रधार?

ईरान–अमेरिका-इजराइल जंग पर दुनिया की नजर: क्या नरेंद्र मोदी बन सकते हैं शांति के सूत्रधार?।मिडिल ईस्ट में जारी ईरान और इजराइल के साथ अमेरिका की जंग के बीच पूरी दुनिया की नजर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिकी हुई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई नेता और रणनीतिक विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह संघर्ष खत्म कराने में भारत अहम भूमिका निभा सकता है

ईरान–अमेरिका-इजराइल जंग पर दुनिया की नजर: क्या नरेंद्र मोदी बन सकते हैं शांति के सूत्रधार?

हाल ही में अलेक्जेंडर स्टब ने प्रधानमंत्री मोदी से इस 18 दिनों से जारी युद्ध को रोकने का आग्रह किया। वहीं अमेरिकी सैन्य विश्लेषक डगलस मैकग्रेगर ने भी सुझाव दिया कि यदि युद्ध रोकना है तो डोनाल्ड ट्रंप को प्रधानमंत्री मोदी से संपर्क करना चाहिए।

यूएई के पूर्व राजदूत हुसैन हसन मिर्जा ने भी कहा कि पीएम मोदी ही ऐसे नेता हैं, जो सभी पक्षों से बिना किसी पक्षपात के बात कर सकते हैं और एक फोन कॉल से तनाव कम करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

 क्यों पीएम मोदी पर टिकी हैं उम्मीदें?

इस जंग को शुरू हुए 2 हफ्ते से ज्यादा समय हो चुका है और इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिख रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और ईरान ने कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचाने की चेतावनी दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी संतुलित विदेश नीति है—

इसी वजह से भारत को एक निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में देखा जा रहा है।

कूटनीतिक सक्रियता

हाल के दिनों में नरेंद्र मोदी ने

से बातचीत की है और साफ कहा है कि सभी मुद्दों का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति से ही संभव है।

चीन क्यों नहीं बन पा रहा मध्यस्थ?

चीन ने भी मध्यस्थता की पेशकश की है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि वह निष्पक्ष नहीं है, क्योंकि उसका झुकाव लंबे समय से ईरान की ओर रहा है।

 वैश्विक असर

निष्कर्ष

मौजूदा हालात में जब कोई भी देश खुलकर मध्यस्थता की जिम्मेदारी नहीं ले रहा, ऐसे में नरेंद्र मोदी को एक संभावित शांति दूत के रूप में देखा जा रहा है। अब देखना होगा कि क्या भारत इस संकट में निर्णायक कूटनीतिक भूमिका निभाता है या नहीं।

 

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