नई दिल्ली । क्या सूखा पड़ेगा? IMD की भविष्यवाणी के बाद डरा रहा है ‘अल नीनो’, जानें क्यों इस साल महंगी हो सकती है आपकी थाली। भारत में कमजोर मानसून और अल नीनो के खतरे से महंगाई बढ़ने की आशंका है। IMD ने सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है, जिससे सब्जियों और अनाज की कीमतें बढ़ सकती हैं। पढ़ें RBI और विशेषज्ञों की चेतावनी और सरकार की तैयारी
मौसम विभाग (IMD) की ताजा भविष्यवाणी ने आम आदमी की जेब पर भारी बोझ पड़ने के संकेत दिए हैं। इस साल मानसून ‘सामान्य से कम’ रहने और प्रशांत महासागर में ‘अल नीनो’ के सक्रिय होने की आशंका है। इसका सीधा असर खेती और खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर पड़ सकता है।
क्या सूखा पड़ेगा? IMD की भविष्यवाणी के बाद डरा रहा है ‘अल नीनो’, जानें क्यों इस साल महंगी हो सकती है आपकी थाली
क्यों बढ़ रही है चिंता? (Key Highlights)
- कमजोर मानसून: IMD के मुताबिक, इस साल बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज का केवल 92% रह सकती है।
- अल नीनो का साया: यह मौसमी बदलाव भारत में सूखे और भीषण गर्मी का कारण बनता है। 1980 के बाद से 70% अल नीनो वर्षों में बारिश कम हुई है।
- महंगाई का ग्राफ: मार्च 2026 में खुदरा महंगाई (CPI) पहले ही 3.4% पर पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त वर्ष 2027 में यह 4.5% के पार जा सकती है।
आपकी जेब पर क्या होगा असर?
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, अगर बुवाई कम हुई तो दालों, सब्जियों और खाद्य तेलों की कीमतों में उछाल आएगा। RBI का अनुमान है कि त्योहारी सीजन (अक्टूबर-दिसंबर) के दौरान महंगाई 5.2% के उच्च स्तर तक जा सकती है।
राहत की खबर: सरकार के पास है ‘अनाज का कवच’
भले ही मानसून कमजोर रहे, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। भारत के पास अनाज का पर्याप्त बफर स्टॉक है:
- अकेले चावल का 380 लाख मीट्रिक टन भंडार मौजूद है।
- यह स्टॉक किसी भी कमी की भरपाई करने में सक्षम है।
- SBI रिसर्च के अनुसार, कमजोर मानसून का मतलब हमेशा महंगाई नहीं होता, बशर्ते मुख्य खेती वाले राज्यों में वितरण सही रहे।

