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निगमीकरण के विरोध की जीत: आयुध निर्माणियों के 99.51% कर्मचारी बोले “हमें सरकारी नौकरी ही चाहिए”

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निगमीकरण के विरोध की जीत: आयुध निर्माणियों के 99.51% कर्मचारी बोले “हमें सरकारी नौकरी ही चाहिए

 

कटनी। देश की 41 आयुध निर्माणियों के रक्षा असैनिक कर्मचारियों में से 99.51 प्रतिशत ने सात रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) में स्थायी रूप से विलय होने के बजाय सेवानिवृत्ति तक केंद्र सरकार के कर्मचारी बने रहने का विकल्प चुना है। ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) ने इसे आयुध निर्माणियों के निगमितीकरण के खिलाफ कर्मचारियों का ऐतिहासिक फैसला बताते हुए, केंद्र सरकार से इस नीति पर पुनर्विचार करने और आयुध निर्माणी बोर्ड को पुनः सरकारी विभाग के रूप में बहाल करने की मांग की है।

 

एआईडीईएफ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य एवं मजदूर संघ अध्यक्ष शिव पाण्डेय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सरकार ने 15 जून 2026 को कर्मचारियों को सात डीपीएसयू में प्रतिनियुक्ति पर रहते हुए केंद्र सरकार की सेवा में बने रहने अथवा संबंधित निगमों में स्थायी रूप से समाहित होने का विकल्प देने संबंधी अधिसूचना जारी की थी। यह कदम मद्रास हाईकोर्ट में सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन और 29 जुलाई 2024 को आए फैसले के बाद उठाया गया।

श्री शिव पाण्डेय ने बताया कि, विकल्प चुनने की अंतिम तिथि 15 अक्टूबर 2026 तक कुल 59,308 कर्मचारियों में से 59,033 ने केंद्र सरकार की सेवा में बने रहने का विकल्प दिया। वहीं, केवल 123 कर्मचारियों ने सात डीपीएसयू में स्थायी समायोजन का विकल्प चुना, जबकि 92 कर्मचारियों ने विभिन्न कारणों से कोई विकल्प नहीं दिया।

 

फेडरेशन का कहना है कि, ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि, कर्मचारियों का भारी बहुमत निगमों में स्थायी विलय के पक्ष में नहीं है। संगठन ने इसे निगमीकरण की नीति के प्रति कर्मचारियों के अविश्वास और सरकारी सेवा की मौजूदा स्थिति को बनाए रखने की उनकी इच्छा का संकेत बताया है। गौरतलब है कि, केंद्र सरकार ने कोविड-19 महामारी के दौरान 224 वर्ष पुरानी आयुध निर्माणी व्यवस्था को सात रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों में विभाजित करने का निर्णय लिया था। फेडरेशन के अनुसार, यह फैसला कर्मचारियों के संगठन को दिए गए पूर्व लिखित आश्वासन के विपरीत और एकतरफा तरीके से लिया गया था। AIDEF ने इस निर्णय को मद्रास हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। संगठन के अनुसार, सुनवाई के दौरान रक्षा मंत्रालय ने अपने जवाबी हलफनामे में स्पष्ट किया था कि, कर्मचारी नए निगमों में प्रतिनियुक्ति पर रहते हुए केंद्र सरकार के कर्मचारी बने रहेंगे, जब तक वे स्वयं स्थायी विलय का विकल्प नहीं चुनते। एआईडीईएफ ने सरकार से आयुध निर्माणी बोर्ड बहाल करने की मांग करते हुए, कर्मचारियों के फैसले को निगमितीकरण के खिलाफ स्पष्ट संदेश बताते हुए केंद्र सरकार से कर्मचारियों की इच्छा का सम्मान करने की अपील की है। साथ ही निगमीकरण की व्यवस्था को वापस लेकर आयुध निर्माणी बोर्ड को पर्याप्त अधिकारों और बजटीय सहायता के साथ पुनः सरकारी विभाग के रूप में स्थापित किया जाए। एआईडीईएफ का कहना है कि, आयुध निर्माणियां देश की रक्षा तैयारियों का महत्वपूर्ण आधार हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से इनकी भूमिका बेहद अहम है। संगठन ने यह भी मांग की है कि, अनुकंपा नियुक्तियों पर लगी रोक हटाई जाए तथा कर्मचारियों की लंबित मांगों का शीघ्र निस्तारण किया जाए।

 

आयुध निर्माणी कटनी में मजदूर संघ के राजेश दुबे, नरेंद्र पटेल, देवेंद्र पाढ़ी, सादिक अली, राकेश मिश्रा, विजय सिंह, अजय परोहा, संजय तिवारी, जितेंद्र सिंह, मनीष तिवारी, आनंद पाण्डेय, कर्मू कुमार घाँसी, राजेश द्विवेदी, इंद्र भूषण, महेंद्र यादव, के लक्ष्मण, शरद धुर्वे, महेश प्रसाद, सतीश मॉंगरे, दुर्गेश सिंह, राजेश कुशवाहा, संजीव सिंह, नंदकिशोर राय, विकास नीलकंठ, जंग बहादुर, संतोष दिग्गी, अतुल नायक, अनंत चरण मुर्मू, मोहब्बत सिंह, प्रविण विश्वकर्मा, शरद यादव, रुखमणि, गीता, माया, आदि ने रक्षा असैनिक कर्मचारियों को इस फैसले के लिए बधाई देते हुए सरकार से कर्मचारियों की भावना को समझने और उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है।

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