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UP Waqf Digitization: यूपी में वक्फ संपत्तियों पर बड़ा एक्शन- ‘उम्मीद’ पोर्टल पर 31 हजार से ज्यादा रजिस्ट्रेशन रद्द; दरगाह-कब्रिस्तानों पर मंडराया संकट

UP Waqf Digitization: यूपी में वक्फ संपत्तियों पर बड़ा एक्शन- ‘उम्मीद’ पोर्टल पर 31 हजार से ज्यादा रजिस्ट्रेशन रद्द; दरगाह-कब्रिस्तानों पर मंडराया संकट

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में वक्फ संपत्तियों के डिजिटाइजेशन और उनके सत्यापन (Verification) को लेकर इस वक्त का सबसे बड़ा अपडेट सामने आया है। केंद्र सरकार के ‘उम्मीद’ (UMMEED) पोर्टल पर दर्ज कराई जा रही संपत्तियों के दस्तावेजों की गहन जांच के बाद उत्तर प्रदेश में अब तक 31,328 वक्फ संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन पूरी तरह रद्द कर दिया गया है।

सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान इन संपत्तियों के कागजातों में इतने बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा और तकनीकी खामियां मिली हैं कि वक्फ ट्रिब्यूनल को इन्हें सीधे खारिज करना पड़ा। रद्द की गई इन संपत्तियों में कई ऐतिहासिक दरगाहों, मस्जिदों और दशकों पुराने कब्रिस्तानों की जमीनें भी शामिल हैं, जिससे अब मुतवल्लियों (प्रबंधकों) के बीच हड़कंप मच गया है।

क्या कहते हैं आंकड़े: आधे से अधिक संपत्तियां अब भी अधर में

‘उम्मीद’ पोर्टल पर उत्तर प्रदेश से दर्ज डेटा के मुताबिक, वर्तमान स्थिति कुछ इस प्रकार है:

  • कुल दर्ज संपत्तियां: 1,18,302
  • अब तक मंजूर (Approved) संपत्तियां: 53,711
  • अंतिम चरण की जांच में (Under Review): 20,546
  • पूरी तरह खारिज/रद्द (Rejected): 31,192 (दावे पूरी तरह खारिज)

उत्तर प्रदेश सुन्नी और शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड की विशेष अपील पर वक्फ ट्रिब्यूनल ने रजिस्ट्रेशन कराने की मियाद को जो 6 महीने के लिए आगे बढ़ाया था, वह अतिरिक्त समय भी अगले महीने 5 जून, 2026 को समाप्त होने जा रहा है।

 कागजातों में खेल! आखिर क्यों धड़ाधड़ रद्द हो रहे हैं रजिस्ट्रेशन?

जांच टीम और वक्फ बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक, जिन 31 हजार से अधिक संपत्तियों को पोर्टल से बाहर का रास्ता दिखाया गया है, उनके पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित गंभीर तकनीकी और प्रशासनिक कमियां पाई गईं:

  1. राजस्व रिकॉर्ड में अंतर: वक्फ बोर्ड के दावों और सरकारी राजस्व अभिलेखों (भूलेख) में दर्ज खसरा नंबर आपस में मेल नहीं खा रहे हैं।

  1. रकबा (Area) का फर्जीवाड़ा: संपत्ति के वास्तविक रकबे (क्षेत्रफल) और वक्फ के कागजों में दर्ज क्षेत्रफल में जमीन-आसमान का भारी अंतर मिला।

  2. दोहरा रजिस्ट्रेशन: एक ही संपत्ति को सुन्नी वक्फ बोर्ड और शिया वक्फ बोर्ड, दोनों जगहों पर दर्ज कराकर विवाद खड़ा किया गया था।

  3. दस्तावेजों में त्रुटियां: कई पीढ़ियों पुराने दस्तावेजों में भारी तकनीकी गलतियां थीं, जिन्हें सुधारा नहीं गया था।

इन जिलों में चला सबसे बड़ा हंटर: जौनपुर टॉप पर

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में वक्फ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन बड़े पैमाने पर निरस्त किए गए हैं। सबसे ज्यादा गाज जौनपुर जिले पर गिरी है। टॉप-10 प्रभावित जिलों की सूची नीचे देखें:

जिला रद्द किए गए रजिस्ट्रेशन की संख्या
जौनपुर 1,938
बाराबंकी 1,521
मुजफ्फरनगर 1,510
अलीगढ़ 1,061
बस्ती 1,000
उन्नाव 908
सीतापुर 906
हरदोई 891
आजमगढ़ 886
लखनऊ 875

5 जून के बाद क्या होगा? मुतवल्लियों के पास क्या है आखिरी रास्ता?

यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड के अंतर्गत करीब 1.26 लाख से अधिक वक्फ संस्थान आते हैं। केंद्र सरकार द्वारा जून 2025 में लॉन्च किए गए ‘उम्मीद’ पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना हाल ही में 5 अप्रैल को लागू हुए वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत बेहद अनिवार्य कर दिया गया है।

आगे का विकल्प:

  • दोबारा अपलोड करने का मौका: अधिकारियों का कहना है कि जिन मुतवल्लियों के रजिस्ट्रेशन रद्द हुए हैं, उनके पास अभी 5 जून तक का समय है। वे अपने सही और प्रामाणिक राजस्व दस्तावेजों के साथ पोर्टल पर दोबारा आवेदन कर सकते हैं।

  • मुकदमेबाजी का चक्कर: यदि 5 जून तक कमियां दूर नहीं हुईं, तो ये संपत्तियां वक्फ के दायरे से पूरी तरह बाहर हो जाएंगी। इसके बाद समय सीमा बढ़ाने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। राहत पाने के लिए मुतवल्लियों को व्यक्तिगत रूप से वक्फ ट्रिब्यूनल के चक्कर काटने होंगे, जो बेहद पेचीदा, खर्चीली और लंबी कानूनी प्रक्रिया है।

Usha Pamnani

20 वर्षों से डिजिटल एवं प्रिंट मीडिया की पत्रकारिता में देश-विदेश, फ़िल्म, खेल सहित सामाजिक खबरों की एक्सपर्ट, वर्तमान में यशभारत डॉट कॉम में वरिष्ठ जिला प्रतिनिधि