दमोह, डिजिटल डेस्क: मध्य प्रदेश के दमोह जिले से विरोध प्रदर्शन की एक बेहद दिलचस्प और अनोखी तस्वीर सामने आई है। यहाँ अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने सरकार को जगाने के लिए सरेआम ‘भैंस के आगे बीन बजाना’ मुहावरे को सच कर दिखाया। कर्मचारियों का यह अनोखा और सांकेतिक प्रदर्शन अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
दमोह में संविदा स्वास्थ्य कर्मियों का अनोखा प्रदर्शन, सड़क पर ‘भैंस के आगे बजाई बीन’; सरकार को जगाने के लिए अपनाया यह तरीका
हड़ताल का 7वां दिन: जब सड़क पर उतरी ‘अड़ियल भैंस’
नियमितीकरण (स्थाई नौकरी) की मांग को लेकर संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का आंदोलन पिछले 7 दिनों से लगातार जारी है। अपने चरणबद्ध आंदोलन के तहत सोमवार को सभी कर्मचारी जिला अस्पताल परिसर के पास स्थित अंबेडकर चौराहे पर इकट्ठा हुए। दमोह में संविदा स्वास्थ्य कर्मियों का अनोखा प्रदर्शन, सड़क पर ‘भैंस के आगे बजाई बीन’; सरकार को जगाने के लिए अपनाया यह तरीका
प्रदर्शन को खास बनाने के लिए कर्मचारी अपने साथ एक भैंस भी लेकर आए थे। कर्मचारियों ने पहले तो भैंस को बकायदा फूलों की माला पहनाई, उसे चारा खिलाया और फिर उसके सामने खड़े होकर बीन बजाना शुरू कर दिया।
बमुश्किल मानी अड़ियल भैंस, कैमरे में कैद हुआ मजेदार नजारा
इस अनोखे प्रदर्शन के दौरान एक मजेदार मोड़ तब आया जब भैंस अपनी अड़ियल पर उतर आई। सड़क के बीचोबीच बीन की आवाज सुनकर भैंस को संभालना कर्मचारियों के लिए बड़ी मशक्कत का काम बन गया। बमुश्किल कर्मचारियों ने भैंस को शांत किया और अपना प्रदर्शन पूरा किया। चौराहे पर मौजूद आम लोग और राहगीर इस रोचक दृश्य को देखने के लिए रुक गए और कई लोगों ने इसे अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर लिया।
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“हमारी हालत भी इस मुहावरे जैसी हो गई है…”
प्रदर्शन कर रहे संविदा स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि यह प्रदर्शन सरकार की अनदेखी के खिलाफ एक कड़ा संदेश है।
- कर्मचारियों का दर्द: पिछले 7 दिनों से वे शांतिपूर्ण तरीके से हड़ताल पर बैठे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
- सांकेतिक संदेश: भैंस के आगे बीन बजाने का मतलब ही यही है कि सरकार हमारी जायज मांगों को लेकर बहरी और अंधी बनी हुई है।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उन्हें स्थाई नौकरी (नियमितीकरण) का अधिकार नहीं मिल जाता, उनका यह आंदोलन अलग-अलग रूपों में जारी रहेगा।








