तिलक महाविद्यालय साहित्यकार जयशंकर प्रसाद की जयंती के अवसर पर साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन

तिलक महाविद्यालय साहित्यकार जयशंकर प्रसाद की जयंती के अवसर पर साहित्यिक संगोष्ठी का आयोज

कटनी-PMCOE शासकीय तिलक स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आज छायावाद के यशस्वी साहित्यकार जयशंकर प्रसाद की जयंती के अवसर पर एक साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जयशंकर प्रसाद जी के तैलचित्र पर पुष्प गुच्छ अर्पित कर किया गया।

इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुनील कुमार वाजपेई ने अपने उद्बोधन में कहा कि जयशंकर प्रसाद का साहित्य भारतीय सांस्कृतिक चेतना, मानवीय संवेदनाओं और राष्ट्रीय गौरव का जीवंत दस्तावेज है। उनकी रचनाएँ आज भी प्रासंगिक हैं और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

इसके पश्चात हिंदी विभाग की अध्यक्ष डॉ. माधुरी गर्ग ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रसाद छायावाद के स्तंभ हैं, जिनकी काव्यात्मकता, दर्शन और भावबोध हिंदी साहित्य को नई ऊँचाइयों तक ले जाता है।

कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए विभाग की वरिष्ठ प्राध्यापिका डॉ. प्रतिमा त्रिपाठी ने जयशंकर प्रसाद के गीतों का सस्वर पाठ किया, जिसे उपस्थित श्रोताओं ने सराहा। वहीं विभाग के प्राध्यापक डॉ. अतुल कुमार ने प्रसाद के नाट्य गीतों का पाठ करते हुए उनकी रचनाओं का विश्लेषण प्रस्तुत किया और उनकी ऐतिहासिक चेतना से सभी को परिचित कराया।

संगोष्ठी में डॉ. विजय कुमार ने जयशंकर प्रसाद के उपन्यास साहित्य पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने प्रसाद की रचनाओं की समकालीनता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जयशंकर प्रसाद मानव जीवन के साहित्यकार हैं और उनका साहित्य मानवीय मूल्यों का उत्कृष्ट प्रतिमान प्रस्तुत करता है।

कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ अतुल कुमार ने किया। इस अवसर पर भारतीय फिल्म संस्थान द्वारा निर्मित जयशंकर प्रसाद पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म का भी प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में कई छात्र-छात्राओं ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रसाद के जीवन एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। अशरफ, पवन, सोनाली, राजा एवं सोनम सहित अन्य विद्यार्थियों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का समापन जयशंकर प्रसाद के साहित्य से प्रेरणा लेकर उनके विचारों को आत्मसात करने के संकल्प के साथ किया गया।

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