
सत्य कहीं अधिक वैज्ञानिक: भोजन में घी मिलाने से कम होता है ‘ग्लाइसेमिक इंडेक्स’, डॉ. तेजप्रकाश व्यास ने बताए दूध-घी के अनोखे फायदे
नई दिल्ली/उज्जैन: भारतीय खान-पान और परंपराओं में दूध और घी का महत्व सदियों से रहा है, लेकिन आधुनिक दौर में इन्हें लेकर कई तरह की भ्रांतियां भी फैली हैं। इसी विषय पर प्रकाश डालते हुए प्रख्यात शिक्षाविद, लेखक, विचारक और विज्ञानी डॉ. तेजप्रकाश व्यास ने दूध और घी के पीछे छिपे गहन वैज्ञानिक महत्व को उजागर किया है. उन्होंने साफ किया कि भोजन में उचित मात्रा में घी का उपयोग कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचाने में मददगार साबित हो सकता है.
यह महत्वपूर्ण विचार डॉ. व्यास ने तवलीन फाउंडेशन द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम ‘सोल स्पेस मीट’ में व्यक्त किए.
पंचामृत में सर्वोच्च है घी का स्थान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. तेजप्रकाश व्यास ने कहा कि हमारी संस्कृति में दूध और उससे बनने वाले उत्पादों को जीवन के ‘पंचामृत’ में शामिल किया गया है. इन सभी दुग्ध उत्पादों में भी घी को सर्वोच्च सम्मान और स्थान प्राप्त है. उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि आज के दौर में कुछ लोग बिना वैज्ञानिक आधार के दूध और घी को स्वास्थ्य के लिए दोषी ठहराने लगे हैं.
भ्रांतियों पर किया कड़ा प्रहार
डॉ. व्यास ने स्वास्थ्य जगत में समय-समय पर बदलने वाले ट्रेंड्स और भ्रांतियों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा:
“आज के समय में दूध और घी को इस तरह पेश किया जा रहा है जैसे वे बीमारियों की जड़ हों. यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे कभी स्वास्थ्य की समस्त समस्याओं का कारण ‘वसा’ (Fat) को बता दिया गया था, तो कभी ‘ग्लूटेन’ को. लेकिन सेहत का सत्य इन सतही बातों से कहीं अधिक गहन, प्राचीन और वैज्ञानिक है.”
घी खाने का वैज्ञानिक लाभ: नियंत्रित रहेगा ब्लड शुगर
विज्ञानी डॉ. व्यास ने भोजन में घी शामिल करने के सबसे बड़े वैज्ञानिक फायदे को साझा किया:
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ग्लाइसेमिक इंडेक्स में कमी: जब हम अपने भोजन में उचित मात्रा में घी मिलाते हैं, तो यह भोजन के ग्लाइसेमिक इंडेक्स (Glycemic Index) को कम कर देता है. सत्य कहीं अधिक वैज्ञानिक: भोजन में घी मिलाने से कम होता है ‘ग्लाइसेमिक इंडेक्स’, डॉ. तेजप्रकाश व्यास ने बताए दूध-घी के अनोखे फायदे
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ग्लूकोज पर नियंत्रण: ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होने की वजह से हमारे रक्त (Blood) में ग्लूकोज का उतार-चढ़ाव अचानक नहीं होता और वह पूरी तरह नियंत्रित रहता है.
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मेटाबालिक सिंड्रोम से बचाव: रक्त में शुगर का स्तर स्थिर रहने के कारण व्यक्ति को मेटाबालिक सिंड्रोम जैसी जटिल और गंभीर समस्याओं का जोखिम काफी हद तक घट जाता है.
तवलीन फाउंडेशन के इस कार्यक्रम में मौजूद बुद्धिजीवियों और प्रतिभागियों ने डॉ. व्यास के इस व्याख्यान को आधुनिक जीवनशैली में भारतीय आहार पद्धति को अपनाने के लिए बेहद उपयोगी और मार्गदर्शक बताया








