कटनी(YASHBHARAT.COM)। शहर की बदहाल व बेतरतीब यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाने अब न जाने कितने प्रयोग किए गए लेकिन शहर की यातायात व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं हुआ। 25 मई 1998 को जिला बनने के बाद जितने भी पुलिस कप्तान आए अपने-अपने हिसाब से यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाने के नित नए प्रयोग करते रहे परंतु शहर की यातायात व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पाई। कुल मिलाकर कटनी शहर यातायात सुधार की प्रयोगशाला बन चुका है। वर्तमान में भी पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा के मार्गदर्शन में यातायात प्रभारी रक्षित निरीक्षक राहुल पांडे के द्धारा भी यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाने हरसंभव प्रयोग व प्रयास किए गए। इन प्रयोग व प्रयासों को कुछ हद तक सफलता भी मिली लेकिन व्यवस्था पूरी तरह पटरी पर नहीं आ पाई और यातयात प्रभारी के रूप में रक्षित निरीक्षक राहुल पांडे के 3 वर्ष पूर्ण होने पर गतदिवस पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा ने यातायात का प्रभार वापस लेते उन्हे कंट्रोल रूम का प्रभार दे दिया और पुलिस लाइन में पदस्थ निरीक्षक अनूप सिंह को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत यातायात का प्रभार सौंप दिया। अब शहर की बिगड़ैल यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाने का जिम्मा निरीक्षक अनूप सिंह के कंधों पर है। शहर की अराजक यातायात व्यवस्था के पीछे मूल जो कारण हैं उनकी ओर किसी का ध्यान नहीं जाता। ये कारण हैं शहर के अंदर पार्किंग की व्यवस्था न होना और सडक़ों पर अतिक्रमण का होना। शहर में नियम विरूद्ध जो शापिंग कॉम्पलेक्स बन रहे हैं, उनमें में भी पार्किंग व्यवस्था नहीं है। जिसकी वजह से ही शहर में जाम की स्थिति निर्मित होती है और शहर के लोग जाम के लिए यातायात पुलिस को जिम्मेदार ठहराने लगते हैं जबकि जाम के लिए पूरी तरह से नगर सरकार जिम्मेदार है। जिसकी सरपरस्ती में बड़े-बड़े व्यापारी 10 फीट की दुकान में 20 फीट तक दुकान के बाहर सामान जमा कर बैठे रहते हैं। साथ ही जो नए शापिंग कॉम्पलेक्स बन रहे हैं, उनमें भी पार्किंग की जगह नहीं छोड़ी जा रही है। शापिंग कॉम्पलेक्स बनाने वाले पार्किंग की जगह नहीं छोड़ रहे हैं और नियम विरूद्ध व नक्शे के विपरित निर्माण कार्य किए जा रहे हैं लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। ज्यादा शिकवा शिकायत हुई तो नगर निगम की कार्रवाई नोटिस जारी करने तक सीमित है। वहीं बिना पार्किंग व्यवस्था के शहर में वाहन मालिकों को तत्काल आर्थिक दंड मिल जाता है। मतलब करे कोई और भरे कोई वाली कहावत चरितार्थ हो रही है।
सेंटर पार्किंग व्यवस्था को पुन: शुरू करने की मांग
कुछ समय पूर्व पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा के निर्देश पर शहर के मुख्य मार्ग पर सेंटर पार्किंग की व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया और नगर सरकार के द्धारा लोहे के डिवाइडर लगाए गए जो कबाड़ हो गए। गौरतलब है कि सेंटर पार्किंग की व्यवस्था समाप्त होने के बाद सडक़ के दोनों ओर दुकानदार व ग्राहक अपने वाहन दुकान के सामने खड़ा करने लगते हैं। जिससे हो ये रहा है कि दोनों ओर की दुकानों में ग्राहकों की संख्या बढऩे पर दोनों ओर काफी सडक़ वाहनों के अतिक्रमण से घिर जाती है। जबकि सेंटर पार्किंग में वाहन सेंटर में पार्क रहने के कारण कम से कम सडक़ दोनों ओर खाली रहती है। लोगों ने तो नगर सरकार से यह भी कहा है कि जब शहर में पार्किंग की व्यवस्था नहीं है तो शहर के अंदर की सडक़ पर डिवाइडर बनाने का क्या फायदा? इसके तो और जगह ही कम होगी। इसलिए डिवाइडर की जगह शहर में सेंटर पार्किंग की व्यवस्था को पुन: बहाल किया जाए।

