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विश्व का इकलौता शिवालय जहाँ शिवजी को चढ़ता है सिंदूर: सतपुड़ा की वादियों में स्थित है ‘तिलक सिंदूर’ धाम

विश्व का इकलौता शिवालय जहाँ शिवजी को चढ़ता है सिंदूर: सतपुड़ा की वादियों में स्थित है ‘तिलक सिंदूर’ धाम

नर्मदापुरम:सतपुड़ा के घने, हरे-भरे और सुरम्य जंगलों के बीच बसा ‘तिलक सिंदूर’ धाम न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे विश्व की आस्था का एक अद्भुत और अलौकिक केंद्र है। यह दुनिया का एकमात्र ऐसा शिवालय है, जहाँ भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग पर जल या बेलपत्र के साथ-साथ विशेष रूप से सिंदूर अर्पण करने की अनूठी परंपरा है।

यह पावन धाम नर्मदापुरम (पूर्व नाम होशंगाबाद) जिले के इटारसी शहर से लगभग 16 किलोमीटर दूर प्राकृतिक सौंदर्य से घिरी पहाड़ियों के बीच स्थित है।

आदिवासी संस्कृति और ‘बड़े देव’ की अटूट महिमा

तिलक सिंदूर मंदिर की परंपराएं स्थानीय गोंड जनजाति की प्राचीन संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई हैं: विश्व का इकलौता शिवालय जहाँ शिवजी को चढ़ता है सिंदूर: सतपुड़ा की वादियों में स्थित है ‘तिलक सिंदूर’ धाम

  • ‘बड़े देव’ के रूप में पूजन: गोंड आदिवासी समुदाय के लोग भगवान शिव को अपने आराध्य ‘बड़े देव’ के रूप में पूजते हैं।

  • सिंदूर अर्पण की परंपरा: आदिवासी समाज में किसी भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ और मांगलिक अवसरों पर सिंदूर का विशेष महत्व होता है। इसी परंपरा के तहत यहाँ शिवलिंग पर सिंदूर चढ़ाने की शुरुआत हुई, जो सदियों से निरंतर चली आ रही है।

  • प्राकृतिक गुफा और सुरम्य वातावरण: मंदिर परिसर एक विशाल प्राकृतिक गुफा के भीतर स्थित है, जहाँ पहुँचने के लिए श्रद्धालुओं को प्राकृतिक सीढ़ियों से होकर गुजरना पड़ता है।

पौराणिक मान्यताएँ और शिवरात्रि पर लगता है मेला

  • भस्मासुर से जुड़ा इतिहास: पौराणिक जनश्रुतियों के अनुसार, जब भस्मासुर से बचने के लिए भगवान शिव सतपुड़ा की पहाड़ियों में छिप रहे थे, तब उन्होंने इस स्थान पर विश्राम किया था।

  • महाशिवरात्रि उत्सव: प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि और सावन के महीने में यहाँ लाखों श्रद्धालु मत्था टेकने पहुँचते हैं। इस दौरान यहाँ एक विशाल मेले का आयोजन होता है, जहाँ मध्य प्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

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