E20 पेट्रोल के खिलाफ ‘गाड़ी मार्च’ से पहले तहसीन पूनावाला नजरबंद; सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर पुलिस पर उठाए सवाल
नई दिल्ली: केंद्र सरकार की E20 (20% इथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल नीति को लेकर देश में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। 31 जुलाई को E20 नीति के विरोध में इंडिया गेट से पार्लियामेंट स्ट्रीट तक प्रस्तावित ‘गाड़ी मार्च’ से ठीक पहले सामाजिक कार्यकर्ता और उद्योगपति तहसीन पूनावाला को दिल्ली पुलिस द्वारा नजरबंद (House Arrest) किए जाने का मामला सामने आया है।
तहसीन पूनावाला ने खुद सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर इस कार्रवाई की जानकारी दी और सरकार तथा पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए।
“बिना किसी नोटिस और दस्तावेज के किया गया डिटेन”
तहसीन पूनावाला द्वारा शेयर किए गए वीडियो में उनके घर पर महिला पुलिसकर्मियों समेत दिल्ली पुलिस की टीम मौजूद दिखाई दे रही है।
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कागजातों की मांग: वीडियो में पूनावाला पुलिस अधिकारियों से डिटेंशन से जुड़े आधिकारिक कागजात और नोटिस मांगते हुए नजर आ रहे हैं।
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वकील से बात करने का समय: उन्होंने पुलिस से कहा कि स्वतंत्रता दिवस से ठीक 15 दिन पहले इस तरह नजरबंद करना गलत है और उन्होंने अपने कानूनी सलाहकार (वकील) से बात करने के लिए समय मांगा।
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सोशल मीडिया पर तंज: पूनावाला ने पोस्ट के साथ लिखा कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और सरकार E20 के मुद्दे पर उठ रहे सवालों से डर रही है।
इंस्टाग्राम अकाउंट सस्पेंड होने का भी किया था दावा
‘गाड़ी मार्च’ से पहले तहसीन पूनावाला ने आरोप लगाया था कि उनका आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट (@tehseenpoonawalla) सस्पेंड कर दिया गया है।
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अभियान दबाने का आरोप: उन्होंने दावा किया कि E20 नीति के खिलाफ चलाए जा रहे उनके जन-जागरूकता अभियान को रोकने के लिए ऐसा किया गया।
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सभ्य भाषा का तर्क: पूनावाला ने कहा, “मैं हमेशा तथ्यों और तर्कों के आधार पर बात करता हूँ और कभी अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं करता, फिर भी कार्रवाई की गई।” हालांकि, इंस्टाग्राम या मेटा की ओर से अकाउंट सस्पेंड किए जाने पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।
क्या है E20 पेट्रोल विरोध और ‘गाड़ी मार्च’ का मुद्दा?
तहसीन पूनावाला और विरोध कर रहे लोगों की मुख्य मांगें:
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अनिवार्यता पर पुनर्विचार: सरकार E20 पेट्रोल को अनिवार्य बनाने के फैसले पर फिर से विचार करे।
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विकल्प की मांग: आम जनता और वाहन मालिकों को सामान्य (गैर-इथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल चुनने का विकल्प दिया जाए।
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वाहनों के नुकसान का डर: विरोध करने वालों का तर्क है कि E20 ईंधन से पुराने वाहनों के इंजन, पाइप और माइलेज पर विपरीत असर पड़ रहा है।








