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विदेशी निवेशकों की ‘बिकवाली’ पर देसी निवेशकों की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’; शेयर बाजार में DIIs की हिस्सेदारी 20.9% के ऐतिहासिक स्तर पर

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विदेशी निवेशकों की ‘बिकवाली’ पर देसी निवेशकों की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’; शेयर बाजार में DIIs की हिस्सेदारी 20.9% के ऐतिहासिक स्तर पर। भारतीय शेयर बाजार अब विदेशी पूंजी के भरोसे नहीं, बल्कि आम भारतीयों की बचत और म्यूचुअल फंड के दम पर मजबूती से खड़ा है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की ताज़ा रिपोर्ट ने इस पर मुहर लगा दी है। मार्च 2026 तिमाही के आंकड़ों के अनुसार, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भारतीय कंपनियों में अपनी पकड़ इतनी मजबूत कर ली है कि अब उन्होंने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) को पीछे छोड़ते हुए एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

विदेशी निवेशकों की ‘बिकवाली’ पर देसी निवेशकों की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’; शेयर बाजार में DIIs की हिस्सेदारी 20.9% के ऐतिहासिक स्तर पर

आंकड़ों में समझें देसी निवेशकों का दबदबा

रिपोर्ट के मुताबिक, निफ्टी 500 इंडेक्स में अब हिस्सेदारी का समीकरण पूरी तरह बदल चुका है:

क्यों विदेशी निवेशकों ने हाथ खींचे और देसी डटे रहे?

वित्त वर्ष 2026 वैश्विक स्तर पर काफी उथल-पुथल भरा रहा। खासकर ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने विदेशी निवेशकों को डरा दिया।

SIP की शक्ति: आम आदमी का भरोसा

रिपोर्ट में इस मजबूती का सबसे बड़ा कारण SIP (सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के जरिए आने वाले निरंतर निवेश को बताया गया है। भारतीय रिटेल निवेशकों के भरोसे ने बाजार को एक ‘सुरक्षा कवच’ प्रदान किया है, जिससे वैश्विक युद्ध जैसी स्थितियों में भी बाजार क्रैश होने से बच गया।

बाजार के लिए आगे क्या?

विशेषज्ञों का मानना है कि एक बार युद्ध का माहौल शांत होने पर FIIs फिर से बाजार में वापसी करेंगे। यदि विदेशी निवेशकों की बिकवाली रुकती है या वे थोड़ी भी खरीदारी शुरू करते हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में जोरदार तेजी (Bull Run) देखने को मिल सकती है।

यह डेटा दर्शाता है कि भारतीय बाजार अब ‘परिपक्व’ (Mature) हो गया है। पहले विदेशी निवेशकों की छोटी सी बिकवाली से बाजार धड़ाम हो जाता था, लेकिन अब घरेलू निवेशकों की बढ़ती ताकत ने बाजार को स्थिरता और मजबूती दी है।

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