‘नौकरी मांगने आई थी…’ ताई के एक मजाक ने राजनीतिक गलियारों में बढ़ाई हलचल, CM मोहन यादव से मुलाकात के बाद कही यह बात
इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर की रेसिडेंसी कोठी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन (‘ताई’) के बीच हुई मुलाकात के बाद सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। मुलाकात के बाद जब मीडिया ने सुमित्रा महाजन से सीएम से मिलने की वजह पूछी, तो उन्होंने अपने चिर-परिचित मजाकिया और तंज भरे अंदाज में कहा— “हां, नौकरी मांगने आई थी।”
ताई का यह बयान सामने आते ही प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं। इंदौर से लगातार 8 बार सांसद रहीं और देश की लोकसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुकीं सुमित्रा महाजन के इस तंज को सत्ता और संगठन के भीतर की हलचलों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।’नौकरी मांगने आई थी…’ ताई के एक मजाक ने राजनीतिक गलियारों में बढ़ाई हलचल, CM मोहन यादव से मुलाकात के बाद कही यह बात
जल संकट और नर्मदा पाइपलाइन का मुद्दा उठाया
हालांकि ‘नौकरी’ की बात तो उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कही थी, लेकिन इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य इंदौर के विकास और शहर की ज्वलंत समस्याओं पर मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित करना था।
बैठक के दौरान ताई ने इंदौर में गहराते जल संकट और नर्मदा पाइपलाइन में बार-बार होने वाले लीकेज का गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने मुख्यमंत्री को सुझाव दिया कि शहर की पूरी वॉटर सप्लाई पाइपलाइन का एक डिजिटल मैप (Digital Mapping) तैयार किया जाना चाहिए।
डिजिटल मैपिंग से सुधरेगी व्यवस्था
ताई का मानना है कि डिजिटल मैपिंग होने से:
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पाइपलाइन की सटीक लोकेशन का पता आसानी से लगाया जा सकेगा।
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लीकेज की जगह तुरंत चिन्हित होगी, जिससे समय रहते मरम्मत हो सकेगी।
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बिना वजह पानी की बर्बादी रुकेगी, जिससे भविष्य में शहर को बड़े जल संकट का सामना न करना पड़े।
प्रशासन की तैयारियों पर सवाल!
इंदौर जैसे स्वच्छता में अव्वल शहर में लगातार पेयजल पाइपलाइन के लीकेज से जलापूर्ति प्रभावित होने और ताई द्वारा दोबारा यह सुझाव दिए जाने के बाद अब स्थानीय प्रशासन और जल कार्य विभाग की तैयारियों पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। ताई के इस रुख से स्पष्ट है कि सक्रिय राजनीति से परे रहने के बाद भी वह इंदौर के जनहित और विकास कार्यों को लेकर पूरी तरह सजग हैं।

