बर्थडे स्पेशल: 8 बार रह चुकी है सांसद, प्यार से सब इनको बुलाते हैं ‘ताई’
नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन आज अपना 75वां जन्मदिन मना रही हैं. उनका जन्म महाराष्ट्र के चिपलून में हुआ था. वे इंदौर से लगातार आठ बार लोकसभा सांसद बनी और वो पहली ऐसी महिला हैं जो लोकसभा चुनावों में कभी पराजित नहीं हुई।
सुमित्रा महाजन के जन्मदिन पर हम आपकों उनसे जुड़ी कुछ खास बाते बताने जा रहे है. सुमित्रा महाजन इंदौर और मालवा क्षेत्र में काफी लोकप्रिय हैं. वह इंदौर के लिए हमेशा सुख-दुख में आगे रहने वाली और लोगों के लिए सुलभ नेता हैं।
अपने कार्यकर्ताओं के बीच ‘ताई’ नाम से लोकप्रिय सुमित्रा महाजन का व्यक्तित्व भी निर्विवाद रहा है. वाजपेयी सरकार में सुमित्रा ने मानव संसाधन, संचार और पेट्रोलियम मंत्रालय का जिम्मा संभाला था।
अपनी ईमानदारी और सरल-सौम्य स्वभाव के लिए पहचानी जाने वाली सुमित्रा महाजन ने 1989 में इंदौर सीट से पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता प्रकाश चंद्र सेठी को हराकर पहली बार संसद में कदम रखा।
इसके बाद वह लगातर इंदौर सीट से चुनी जाती रही हैं. साल 2014 में सुमित्रा ने कांग्रेस प्रत्याशी सत्यनारायण पटेल को 4,66,301 वोट से हराकर अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया था।
सुमित्रा महाजन का जन्म 12 अप्रैल 1943 को रत्नागिरी जिले के चिपलौन में हुआ. उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से पढ़ाई की. एमए और एलएलबी करने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और पीछे मुड़कर फिर कभी नहीं देखा.
लोग बताते हैं कि बेहद शांत स्वभाव की सुमित्रा मूलत: महाराष्ट्र की हैं. वह इंदौर में बहू बनकर आईं थीं लेकिन वह अपने व्यवहार से यहां की बेटी फिर ताई बन गईं. मराठी परिवार से ताल्लुक होने के चलते सुमित्रा का मराठी वोटों पर खास पकड़ है. ताई को केवल एक बेटा मंदार महाजन हैं, वह भी राजनीति में हैं।
लोकसभा की भावी स्पीकर के दिन की शुरुआत सुबह पौने सात बजे होती है. वह सुबह दो गिलास शहद-पानी नियमित रूप से पीती हैं. इसके अलावा व्यायाम भी करती हैं।
नहाने के बाद सूर्य व तुलसी को अर्घ्य देना भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा है. हर दिन घर से निकलने से पहले भगवान के मंदिर में 10 मिनट पूजा करती हैं. पूजा के दौरान वह नियमित रूप से गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करती हैं।
सुमित्रा अपने खान-पान के प्रति काफी सजग हैं। वह कभी भी बाहर का खाना नहीं खाती हैं. इस कारण वह हमेशा टिफिन में रोटी-सब्जी या दाल-चावल रखे रहती हैं।
ताई के वार्डरोब में साड़ियों का खास सेट हमेशा की तरह तैयार होता है. मौसम के हिसाब से बहू वार्डरोब को भी सेट कर देती है. गर्मी में कॉटन की साड़ी आगे और सिल्क की साड़ी पीछे कर दी जाती है।
ताई बताती हैं कि उनके पति को साड़ियां खरीदने का बहुत शौक था. वे एक साथ कई साड़ियां लाते थे. ताई आमतौर पर सुबह जो साड़ी पहनती है उसी में शाम तक के कार्यक्रमों में दिखती है. यदि दिन में साड़ी ज्यादा क्रश हो जाती है तो ही वे चेंज करती है।
ताई सिर्फ घर का पानी पीती हैं. दिनभर की भागदौड़ के बाद रात को थकान मिटाने के लिए वे रात को नियमित रूप से हल्दी व गर्म पानी हैं।

