यह याचिका कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार द्वारा दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रतिमा बागरी ने गलत तरीके से अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनवाकर आरक्षण का लाभ लिया और उसी आधार पर सतना जिले की रैगांव विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर मंत्री पद हासिल किया।
याचिका में यह भी कहा गया है कि बागरी जाति संबंधित क्षेत्र में अनुसूचित जाति की सूची में शामिल नहीं है और मंत्री वास्तव में राजपूत (ठाकुर) समुदाय से संबंध रखती हैं।
इसके समर्थन में 1961 और 1971 की जातिगत जनगणना, वर्ष 2003 में राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति के निर्णय और 2007 के केंद्र सरकार के राजपत्र का हवाला दिया गया है, जिनमें बागरी जाति को अनुसूचित जाति श्रेणी में शामिल नहीं बताया गया है।
बताया गया कि इस मामले में एक वर्ष पूर्व उच्च स्तरीय जांच समिति के समक्ष शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन समय पर जांच पूरी नहीं होने के कारण याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि हाई लेवल कास्ट स्क्रूटनी कमेटी अब नियमानुसार जांच कर निर्णय लेगी।
कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता के आवेदन के आधार पर समिति सुनवाई करेगी और सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा।