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त्योहारी सीजन में महंगाई से राहत: सरकार ने घी, मैदा, बेसन की कीमतों पर कसी नकेल

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केंद्र सरकार ने त्योहारी सीजन में खाने-पीने की जरूरी चीजों की कीमतों पर निगरानी रखने के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने 16 और खाने पीने की चीजों के दाम की रोजाना मॉनिटरिंग करने का फैसला किया है। अभी तक सिर्फ 22 जरूरी चीजों के दाम की मॉनिटरिंग हो रही थी।

केंद्रीय खाद्य व उपभोक्ता मामलों के मंत्री ने प्राइस मॉनिटरिंग सिस्टम (PMS) मोबाइल एप के वर्जन 4.0 की शुरुआत की। इसके तहत सरकार बैंगन, बाजरा, रागी, अंडा, सूजी, बेसन, मैदा, घी, काली मिर्च, धनिया, जीरा, लाल मिर्च, हल्दी और केला जैसे 16 आइटम पर भी नजर रखेगी। इसके लिए सरकार ने देश के 34 राज्यों के 550 केंद्रों से बनाए हैं। यहां से दामों की मॉनिटरिंग की जाएगी। अभी तक सरकार चावल, गेहूं, आटा, चना दाल, अरहर दाल, मूंगफली का तेल, सरसों का तेल, वनस्पति, चीनी, चाय, नमक, आलू, प्याज, दूध, मसूर दाल, मूंग दाल, उड़द दाल, गुड़, सोया तेल, सूरजमुखी तेल,पाम तेल, टमाटर की मॉनिटरिंग करती थी।

 

प्राइस मॉनिटरिंग सिस्टम मोबाइल एप के 4.0 वर्जन की शुरुआत करते हुए केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा, सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग ने 1 अगस्त, 2024 से प्राइस मॉनिटरिंग के तहत 16 अतिरिक्त वस्तुओं को शामिल किया है। रोजाना कीमतों की निगरानी के तहत पहले से ही 22 वस्तुएं शामिल हैं। अब कुल 38 चीजों के कीमतों की निगरानी की जाएगी।

विभाग 34 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 550 केन्द्रों से रोजाना कीमतों की निगरानी कर रहा है। विभाग द्वारा निगरानी किए जा रहे प्राइस डेटा सरकार, आरबीआई और विश्लेषकों को सीपीआई मुद्रास्फीति के बारे में नीतिगत फैसले के लिए अग्रिम जानकारी प्रदान करते हैं। 38 चीजों का कुल सीपीआई भार में लगभग 31 फीसदी हिस्सा है, जबकि 22 चीजों का सीपीआई भार 26.5 फीसदी है। नई जोड़ी गई 16 चीजों में बाजरा, ज्वार, रागी, सूजी (गेहूं), मैदा (गेहूं), बेसन, घी, मक्खन, बैंगन, अंडा, काली मिर्च, धनिया, जीरा, लाल मिर्च, हल्दी पाउडर और केला शामिल हैं।

डेली प्राइस मॉनिटरिंग मूल्य निगरानी के तहत खाद्य पदार्थों के कवरेज में बढ़ोतरी खाद्य पदार्थों में कीमत अस्थिरता को स्थिर करने और समग्र मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए नीतिगत उपायों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह पहल उपभोक्ताओं के लिए जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता और सामर्थ्य के मुद्दों पर ध्यान दिए जाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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